पूजनोत्सव की तैयारी जोरों पर, प्रतिमा व पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे है कलाकार
हसामुद्दीन
तीनपहाड़-शारदीय नवरात्र को लेकर सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति तीनपहाड़ की तैयारी जोर-शोर से पूजा कमिटी के द्वारा की जा रही है.इस वर्ष की पूजा को आकर्षक और भव्य बनाने के लिए कमेटी के सभी सदस्य कड़ी मेहनत कर रहे हैं. तीनपहाड़ की दुर्गा पूजा आज के दौर में अपनी अलग पहचान और मिसाल कायम कर रही है.यहां की सबसे बड़ी खासियत है कि दुर्गा पूजा कमेटी के गठन में दोनों समुदायों के लोगों की भागीदारी होती है. सभी आपस में मिल-जुलकर मां दुर्गा पूजनोत्सव को शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराते है. यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है जो आज के समय में अनूठा मिसाल है.
यहां की परंपरा के अनुसार सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति तीनपहाड़ के अध्यक्ष पद पर जो भी वर्तमान में तीनपहाड़ स्टेशन प्रबंधक होते हैं वही अध्यक्ष होते हैं. वहीं सांप्रदायिक एकता की मिसाल देते हुए समिति के उपाध्यक्ष पद पर मो. नाजिम लड्डू को बनाया गया है. जो 2020 से अब तक इस पद को बखूबी निभा रहे हैं.उनसे पहले उनके पिता स्व. मो. यासीन सरदार इस पद पर थे. उनके देहांत के बाद लोगों द्वारा कमेटी गठन में इनका चयन किया था.
105 वर्षों से की जा रही है तीनपहाड़ की दुर्गा पूजा
तीनपहाड़-तीनपहाड़ में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना लगभग 105 वर्षों से भी पहले से होती आ रही है. भक्तों की आस्था है कि सच्चे मन से सेवा और आराधना करने से उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सार्वजनिक दुर्गा पूजा कमेटी द्वारा तीनपहाड़ रेलवे परिसर में इस वर्ष भव्य मंदिर का निर्माण कर प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है.बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना कोलकाता के रहने वाले और तीनपहाड़ रेलवे के पूर्व स्टेशन प्रबंधक चटर्जी बाबू द्वारा 1934 में की गई थी.तब से आज तक ग्रामीणों के सहयोग से माता दुर्गा की पूजा होते आ रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि अंग्रेजों के समय से भी पहले से यहां पूजा हो रही है. लेकिन पहले अस्थायी रूप से लोहिया भवन के पास पूजा की जाती थी.सार्वजनिक दुर्गा मंदिर की पूजा-अर्चना पुरोहित राजकिशोर पांडे द्वारा की जाती है. वहीं समिति के सचिव सिद्धार्थ यादव उर्फ बल्ला ने बताया कि इस वर्ष भी माता रानी की पूजा-अर्चना धूमधाम से होगी. अभी मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है.इसके अलावे छोटा लेकिन आकर्षक पंडाल भी बनाया जा रहा है.पूजा पर भव्य मेले का आयोजन किया गया है. जिसमें झूला, टाॅवर झुला, जंपिंग, मिक्की माउस मेले की शोभा बढ़ाएंगे.
मेले में खिलौना, नाश्ता, मिठाई, जलेबी, गुपचुप, चाट सहित अन्य दुकानें लगाने की तैयारी चल रही है.सप्तमी पूजा को पूजा समिति के द्वारा गाजे-बाजे के साथ आकर्षक व भव्य कलश शोभा यात्रा निकाली जाएगी. जो मंदिर से निकलकर रामपुरा नदी तक जाएगी.वहां से जल भरा जाएगा. अष्टमी और नवमी के दिन मेला लगेगा और दशमी को आदिवासी मेले का आयोजन किया जाएंगा. जिसमें विशाल मेला लगता है. दशमी को आदिवासी समुदाय के लोग मंदिर पहुंचकर माता का दर्शन करते हैं और मंदिर प्रांगण में पारंपरिक नृत्य करते हैं. जो अच्छा कला प्रदर्शन करता है उसे पूजा कमेटी के द्वारा पुरस्कृत किया जाता है.कमेटी द्वारा जगह-जगह वॉलेंटियर लगाए जाते हैं. ताकि भक्तों को कोई परेशानी न हो. पूजा के दौरान तीनपहाड़ में भारी वाहनों का प्रवेश पर प्रशासन द्वारा रोक लगा दिया जाता है. ताकि सड़क जाम ना हो और मेला सुचारू रूप से सफल हो सके.


