2021 के बाद से ड्रोन की मदद से तस्करी में तेजी देखी गई
नई दिल्ली । पाकिस्तान से संचालित हो रहे नशीली दवाओं की तस्करी के नेटवर्क पंजाब में घुसपैठ के लिए उन्नत तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफॉर्म जैसे स्क्रेड और जंगी, वर्चुअल नंबर, फर्जी केवाईसी-आधारित सिम कार्ड और जीपीएस-सक्षम ड्रोन शामिल हैं। इन तरीकों से वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच निकलते हैं और पंजाब में अवैध माल की तस्करी को अंजाम देते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा नार्को-टेररिज्म और नशे के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करने के साथ गृह मंत्रालय को पंजाब पुलिस से ड्रोन प्रयोगशालाओं की स्थापना का अनुरोध प्राप्त हुआ है। सूत्रों के मुताबिक ये सुविधाएं पाकिस्तान स्थित ड्रग सिंडिकेट द्वारा सीमा पार भेजे गए ड्रोन के फ्लाइट लॉग डेटा की जांच में मदद करेंगी। हाल के वर्षों में, ड्रोन-आधारित तस्करी सीमावर्ती राज्यों, विशेषकर पंजाब के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरी है। 2021 के बाद से, ड्रोन-सहायता प्राप्त नशीली दवाओं की तस्करी में तेजी से वृद्धि देखी गई है, जिससे पंजाब देश का सबसे ज्यादा प्रभावित सीमावर्ती राज्य बन गया है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि अकेले 2025 में, देश भर में ड्रोन से संबंधित नशीली दवाओं की तस्करी की 305 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 298 पंजाब सीमा पर हुईं। इन घटनाओं में लगभग 460 किलोग्राम नशीले पदार्थों की बरामदगी हुई। इस बरामद खेप में 448 किलोग्राम हेरोइन, नौ किलोग्राम मेथामफेटामाइन और तीन किलोग्राम अफीम शामिल थी, जो राज्य में इस उभरते खतरे की गंभीरता को दर्शाती है। सूत्रों ने बताया कि पंजाब, अंतरराष्ट्रीय सीमा से अपनी निकटता के कारण, सीमा पार तस्करी की गतिविधियों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
यहां नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों की आपूर्ति और आतंकी वित्तपोषण का एक उभरता हुआ गठजोड़ सक्रिय है।
ड्रग सिंडिकेट भारत में पाकिस्तान की सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की अवैध आपूर्ति का समन्वय करने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि ये एप्लिकेशन इंटरसेप्ट करने में मुश्किल होते हैं, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस बीच, नार्को-टेररिज्म से जुड़े मामलों समेत ड्रग मामलों की जांच की निगरानी के लिए, केंद्र ने एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया है। नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकी वित्तपोषण से उनके लिंक से निपटने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा पंजाब में अब तक चार राज्य-स्तरीय जेसीसी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन उपायों के बावजूद, उपरोक्त चुनौतियां बनी हुई हैं और हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में सीमावर्ती जिलों के पुलिस अधिकारियों के एक मंथन सत्र के दौरान इन्हें केंद्र के समक्ष उठाया था, जिसमें पंजाब ने विशेष रूप से इन चिंताओं को उजागर किया था।


