पटना । बिहार में मतदाता सूची का गहन परीक्षण कार्य चल रहा है। पुनरीक्षण कार्य को लेकर पूरे बिहार में बवाल मचा हुआ है। मतदाताओं से फार्म भरवाये जा रहे हैं, या भरे जा रहे हैं। चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार बीएलओ को प्रत्येक मतदाता को पार्टी देनी है। मतदाता को पावती नहीं दी जा रही है। कई बीएलओ के ऊपर मुकदमा दायर किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग की गोपनीयता को भंग किया है। कहीं पर मतदाताओं से पैसे लेने की शिकायत भी चुनाव आयोग को मिली है। रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये जा रहे हैं। पुनरीक्षण का काम गोपनीय तरीके से किया जा रहा है। जिसको लेकर मतदाताओं और विपक्षी दलों में चुनाव आयोग पऱ संदेह बढ़ता ही चला जा रहा है।
मुजफ्फरनगर के बोचहाँ विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 264 पर एक ही एपिक नंबर पर एक से अधिक नाम दर्ज हैं। एपिक नंबर बीआर/ 10/060/044703 पर ईद मोहम्मद और मोमिना खातून का नाम दर्ज है। एपिक नंबर बीआर/10/060/044724 पर तीन नाम दर्ज हैं। फिरोज और उसके माता-पिता का नाम एक ही एपिक में दर्ज है। ऐसे सैकड़ो उदाहरण है। मतदाता भ्रमित हो रहे हैं। कौन सा इपीक नंबर भरें। जिससे उसका फॉर्म जमा हो जाए। एक ही एपिक नंबर पर एक से अधिक मतदाताओं के नाम होने के कारण मतदाता सूची से नाम कटने का डर मतदाताओं को सता रहा है। जिसके कारण पूरे बिहार में अफरा- तफरी का माहौल मचा हुआ है। मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 28 जुलाई को इस मामले की सुनवाई होना है। उसके बाद भी जिस तरह से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम बिहार में किया जा रहा है। उसकी चर्चा देशभर में हो रही है।


