◆रोस्टर में बदलाव से बढ़ा विवाद,डॉ. कुणाल पांडेय ने सीसीटीवी फुटेज जांचने का किया आग्रह
◆डॉक्टरों से बेहतर सेवा की अपेक्षा तभी की जा सकती है, जब उन्हें उचित कार्य-परिस्थितियां उपलब्ध हों
विशेष संवाददाता
दुमका । फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PJMCH) दुमका में ड्यूटी रोस्टर को लेकर विवाद सामने आया है। अस्पताल के एक मेडिकल ऑफिसर डॉ. कुणाल पांडेय ने अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी शो-कॉज नोटिस के जवाब में अपना स्पष्टीकरण देते हुए रोस्टर में किए गए बदलाव को गलत बताया है।डॉ. पांडेय ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट को भेजे अपने जवाब में कहा है कि उन्हें 23 फरवरी 2026 को जारी शो-कॉज नोटिस 24 फरवरी को व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि पहले उनकी इमरजेंसी ड्यूटी बुधवार को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक निर्धारित थी, लेकिन बाद में विभागीय पत्र के माध्यम से इसे बदलकर रविवार कर दिया गया, जो उनके अनुसार रोस्टर में गलत तरीके से किया गया परिवर्तन था।डॉ कुणाल ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने विभाग के तत्कालीन विभागाध्यक्ष से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की थी।पर उन्होंने रेस्पांड नहीं किया।22 फरवरी को पूरी रात की ड्यूटी के बाद भी वे उसी दिन शाम को ड्यूटी पर पहुंचे थे, लेकिन लगातार ड्यूटी के कारण अत्यधिक थकान होने की वजह से उन्होंने सहकर्मी डॉक्टर से आवश्यकता पड़ने पर कॉल करने को कहा था।डॉ. पांडेय ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा कि उस दिन की पूरी स्थिति इमरजेंसी वार्ड के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से 22 फरवरी को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक और 23 फरवरी को ओपीडी के समय 9 बजे सुबह से 3 बजे दोपहर तक के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने का अनुरोध किया है।उन्होंने कहा कि डॉक्टरों से बेहतर सेवा की अपेक्षा तभी की जा सकती है, जब उन्हें उचित कार्य-परिस्थितियां उपलब्ध हों। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के शो-कॉज नोटिस से काम कर रहे डॉक्टरों का मनोबल गिरता है।
—
सुपरिटेंडेंट ने शोकॉज के जवाब को बताया असंतोषजनक
इधर फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. रूबेन हेम्ब्रम ने बताया कि अस्पताल में एक मरीज के निधन के बाद डॉक्टर की अनुपस्थिति को लेकर हंगामा हुआ था।इसके बाद डॉ. कुणाल पांडेय को शोकॉज किया गया था।सुपरिटेंडेंट डॉ.हेम्ब्रम ने बताया कि डॉ.कुणाल पांडेय ने शोकॉज का जो जवाब दिया है,वह असंतोषजनक है।इसे अब विचार के लिए मेडिकल बोर्ड में रखा जाएगा।मेडिकल बोर्ड का जो निर्णय होगा, उसे सरकार को भेजा जाएगा।


