◆SKMU के 10वें दीक्षांत समारोह में शिक्षा, रोजगार और क्षेत्रीय विकास का बड़ा संदेश
डॉ.सुमन सिंह
दुमका। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का 10 वां दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियों और स्वर्ण पदकों के वितरण का आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसने संताल परगना में उच्च शिक्षा, रोजगार और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं पर भी महत्वपूर्ण विमर्श को सामने रखा। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो की उपस्थिति में आयोजित समारोह में 38 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक तथा 15 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
राज्यपाल के संबोधन का संदेश साफ था- शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और क्षेत्र के विकास में योगदान देना भी है। उन्होंने संताल हूल के अमर नायकों सिदो-कान्हू के साहस, संघर्ष और न्याय की भावना से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने विकसित भारत @2047 के विजन का उल्लेख करते हुए झारखंड में उद्योग, ऊर्जा और संबंधित क्षेत्रों में 99 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को विकास की नई संभावनाओं से जोड़ा। हालांकि संताल परगना के संदर्भ में इन निवेश प्रस्तावों की असली सफलता इस बात से तय होगी कि स्थानीय युवाओं को कितने रोजगार के अवसर मिलते हैं।
रोजगार के सीमित अवसरों के कारण क्षेत्र से होने वाले पलायन की चुनौती को रेखांकित करते हुए उन्होंने खनिज एवं वनोपज के मूल्यवर्धन, संताल शिल्प, सांस्कृतिक पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और एमएसएमई को बढ़ावा देने पर जोर दिया। युवाओं को स्किल इंडिया, पीएमईजीपी और मुद्रा जैसी योजनाओं से जुड़ने की सलाह भी दी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन पर जोर देते हुए राज्यपाल ने बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स और कौशल विकास को पाठ्यक्रम से जोड़ने की जरूरत बताई। विश्वविद्यालय में 20 स्नातकोत्तर विभागों की स्वीकृति और 125 शिक्षण पदों के सृजन को उन्होंने उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
हालांकि इन पहलों की वास्तविक सफलता गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, योग्य शिक्षकों की उपलब्धता, शोध सुविधाओं और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के विकास पर निर्भर करेगी।
राज्यपाल ने उन्नत भारत अभियान को मजबूत करने, आदिवासी समाज पर सामाजिक एवं वैज्ञानिक शोध का विस्तार करने तथा संताल अकादमी और मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण पर भी जोर दिया। संताल परगना की विशिष्ट भाषा, संस्कृति, लोक साहित्य और पारंपरिक ज्ञान को शोध के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इस समारोह ने विश्वविद्यालय के सामने विकास का एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। अब चुनौती इन विचारों को ठोस शैक्षणिक कार्यक्रमों, शोध परियोजनाओं, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों में बदलने की है।
सिदो-कान्हू की ऐतिहासिक धरती पर स्थापित इस विश्वविद्यालय की असली उपलब्धि केवल उपाधियां बांटना नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षित और सक्षम पीढ़ी तैयार करना होगी, जो अपनी प्रतिभा से संताल परगना के सामाजिक और आर्थिक भविष्य को नई दिशा दे सके।




