रामा कान्त मालवीय
देवघर:-देवघर जिले में संचालित कुपोषण उपचार केंद्रों (एमटीसी) की अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक की रिपोर्ट सामने आई है, जो कुपोषण के खिलाफ चल रहे प्रयासों की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है। जिले के सदर अस्पताल, जसीडीह, करौं, मधुपुर और पालाजोरी स्थित एमटीसी केंद्रों में इस अवधि के दौरान कुपोषित बच्चों के उपचार, देखभाल और पुनर्वास का कार्य लगातार किया गया। रिपोर्ट के अनुसार इन केंद्रों पर गंभीर रूप से कुपोषित (SAM) बच्चों को भर्ती कर उनका समुचित इलाज, पोषणयुक्त आहार और चिकित्सकीय निगरानी प्रदान की गई। स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत बच्चों की नियमित जांच, वजन माप, पोषण स्तर की निगरानी और माता-पिता को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया। सदर अस्पताल स्थित एमटीसी में सर्वाधिक बच्चों का उपचार किया गया, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं अपेक्षाकृत बेहतर होने के कारण अधिक संख्या में मरीज पहुंचे। वहीं जसीडीह और मधुपुर केंद्रों में भी संतोषजनक प्रगति देखी गई है। करौं और पालाजोरी जैसे प्रखंडों में अपेक्षाकृत कम संख्या में बच्चे भर्ती हुए, जो एक ओर वहां जागरूकता और सुधार का संकेत है, तो दूसरी ओर निगरानी और सर्वेक्षण को और मजबूत करने की आवश्यकता भी दर्शाता है। इस दौरान अधिकांश बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार दर्ज किया गया और उन्हें स्वस्थ होने के बाद घर भेजा गया। साथ ही परिजनों को बच्चों के पोषण, स्वच्छता और देखभाल के बारे में आवश्यक जानकारी दी गई, ताकि दोबारा कुपोषण की स्थिति उत्पन्न न हो। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुपोषण के खिलाफ यह अभियान निरंतर जारी है और आने वाले समय में और बेहतर परिणाम लाने के लिए प्रयास तेज किए जाएंगे। आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं और चिकित्सा टीम के संयुक्त प्रयास से जिले में कुपोषण की दर को कम करने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
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कुपोषण उपचार केंद्र (देवघर) – रिपोर्ट (अप्रैल 2025 से फरवरी 2026)
1. केंद्र एवं स्थान:
सदर अस्पताल, जसीडीह, करौं, मधुपुर और पालाजोरी में एमटीसी संचालित हैं।
2. भर्ती स्थिति (SAM Child Admission):
कुल 500 नए बच्चे भर्ती हुए। पुनः भर्ती 13 और 5 रिलैप्स केस दर्ज हुए। कुल भर्ती 518 रही।
3. केंद्रवार कुल भर्ती:
सदर अस्पताल–79, जसीडीह–105, करौं–89, मधुपुर–119, पालाजोरी–126।
4. रेफरल स्रोत:
AWW–99, सहिया–124, ANM–93, स्वयं–75, OPD–96, अन्य–31।
5. बच्चों की स्थिति:
कुल 463 बच्चों को डिस्चार्ज किया गया। 7 बच्चों का मेडिकल ट्रांसफर हुआ।
6. बेड उपयोग:
कुल 50 बेड उपलब्ध रहे। 10813 बेड उपयोग हुआ, जबकि 16420 बेड उपलब्ध थे।
7. बेड ऑक्यूपेंसी रेट:
औसत 66% रहा।
केंद्रवार—सदर अस्पताल 38%, जसीडीह 85%, करौं 66%, मधुपुर 69%, पालाजोरी 72%।
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देवघर सदर अस्पताल में कुपोषण वार्ड खाली, सिस्टम की बड़ी नाकामी उजागर
देवघर :-देवघर सदर अस्पताल में कुपोषण वार्ड की बदहाल स्थिति ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुपोषण काउंसलर चांदनी का कहना है कि वह यहां अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और चाइल्ड ओपीडी में भी ड्यूटी कर रही हैं, लेकिन मार्च माह की 27 तारीख तक कुपोषण वार्ड में एक भी बच्चा भर्ती नहीं हुआ है। उनका साफ कहना है कि जब कोई बच्चा ही नहीं आ रहा, तो वे आखिर क्या करें। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कुपोषण कक्षा सिविल सर्जन कार्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है, फिर भी पूरी व्यवस्था निष्क्रिय नजर आ रही है। बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में क्षेत्र से कुपोषण खत्म हो गया है, या फिर जमीनी स्तर पर पहचान और रेफरल सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का अचानक गायब हो जाना संभव नहीं है। ऐसे में यह स्थिति साफ तौर पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने की मानसिकता को उजागर करती है।
चांदनी-देवघर कुपोषण काउंसलर
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जसीडीह CHC में कुपोषण पर सिस्टम फेल, अस्पताल में एक भी कुपोषण बच्चा नहीं है भर्ती
देवघर:- जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में कुपोषण वार्ड की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कुपोषण काउंसलर गायत्री ने बताया कि वह जसीडीह में काउंसलर के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन मार्च माह की 27 तारीख तक एक भी बच्चा कुपोषण वार्ड में भर्ती नहीं हुआ है। उनका कहना है कि जब कोई बच्चा ही नहीं आ रहा है, तो वे अपने कार्य को प्रभावी ढंग से कैसे निभाएं। जसीडीह क्षेत्र काफी बड़ा होने के बावजूद कुपोषित बच्चों का वार्ड में न आना कई सवाल खड़े करता है। यह स्थिति या तो जमीनी स्तर पर सर्वे और पहचान में कमी को दर्शाती है, या फिर स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में कुपोषण की समस्या पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं, ऐसे में वार्ड का खाली रहना व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है।
गायत्री
जसीडीह कुपोषण काउंसलर
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पालोजोरी CHC की पहल रंग लाई, कुपोषण के खिलाफ अभियान में दिख रही सक्रियता
देवघर:- पालोजोरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में कुपोषण के खिलाफ सकारात्मक और सक्रिय प्रयास देखने को मिल रहे हैं। कुपोषण काउंसलर वर्षा कुमारी ने बताया कि वे निरंतर काउंसलर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और मार्च माह की 27 तारीख तक कुपोषण वार्ड में 6 बच्चों को चिन्हित कर भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि केवल अस्पताल तक सीमित न रहकर टीम द्वारा क्षेत्र में घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की पहचान का अभियान भी तेज़ी से चलाया जा रहा है। पालोजोरी का अधिकांश हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आता है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है, इसके बावजूद स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता उल्लेखनीय है। टीम न सिर्फ बच्चों को चिन्हित कर रही है, बल्कि अभिभावकों को संतुलित आहार और पोषण के प्रति जागरूक भी बना रही है। स्वास्थ्य विभाग की यह पहल दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति और सतत प्रयास से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
वर्षा कुमारी
पालोजोरी कुपोषण काउंसलर


