नई दिल्ली । भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि आने वाले वर्षों में, भारत का हाई-स्पीड रेल नेटवर्क कई छोटे घरेलू हवाई मार्गों पर हवाई यात्रा को करीब-करीब समाप्त कर देगा। सीआईआई बिजनेस समिट में रेल मंत्री वैष्णव ने एयरलाइन निवेशकों को आगाह कर संकेत दिया कि मुंबई-पुणे, हैदराबाद-बेंगलुरु और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे प्रमुख रूटों पर यात्री अब फ्लाइट के बजाय बुलेट ट्रेन को प्राथमिकता देने वाले है। केंद्रीय मंत्री वैष्णव का तर्क है कि जिस तरह जापान, चीन और दक्षिण कोरिया में हाई-स्पीड रेल ने घरेलू विमानन बाजार को पूरी तरह बदल दिया है, ठीक उसी तरह भारत में भी एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। केंद्रीय रेल मंत्री के अनुसार, मुंबई से पुणे की दूरी बुलेट ट्रेन से केवल 48 मिनट में तय होगी। इसी तरह, पुणे से हैदराबाद की यात्रा 1 घंटा 55 मिनट में, हैदराबाद से बेंगलुरु की यात्रा 2 घंटे 8 मिनट में और बेंगलुरु से चेन्नई की यात्रा महज 78 मिनट में पूरी होगी। इतनी कम यात्रा अवधि के साथ, लोग हवाई अड्डों पर लंबी सुरक्षा जांच, शहर के ट्रैफिक और उड़ानों में होने वाली देरी जैसी परेशानियों से बचने के लिए बुलेट ट्रेन को कहीं अधिक सुविधाजनक पाएंगे। उन्होंने विश्वास जताकर कहा कि भविष्य में इन रूटों पर 99 प्रतिशत यात्रा रेलवे के माध्यम से ही होगी, जिससे हवाई यात्रा की प्रासंगिकता करीब खत्म हो जाएगी। रेल मंत्री वैष्णव ने इस महत्वाकांक्षी योजना के वित्तीय पहलू पर भी प्रकाश डाला, बताया कि भारत सरकार बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर करीब 16 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है।
इस परियोजना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा भारतीय कंपनियों और सप्लायर्स को मिलेगा, जिससे देश में रोजगार के नए मौके पैदा होने और विनिर्माण क्षेत्र को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने घोषणा की कि सरकार जल्द ही नए कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है और परियोजना को निर्धारित समय से भी तेज गति से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि इस सपने को जल्द से जल्द हकीकत में बदला जा सके। वहीं परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क सफल होता है, तब यह देश के पूरे परिवहन क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है। इससे न केवल यात्रा तेज और अधिक आरामदायक बनेगी, बल्कि सड़क और हवाई यातायात का दबाव भी काफी हद तक कम होगा। इसके साथ ही, ईंधन की खपत में कमी और पर्यावरणीय प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, एयरलाइन कंपनियों के लिए यह निश्चित रूप से एक बड़ी चुनौती खड़ी करेगा, क्योंकि छोटे मार्गों पर उनकी कमाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रभावित हो सकता है। अब देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भारत का यह बुलेट ट्रेन का सपना कितनी तेजी से वास्तविकता का रूप लेता है और देश की परिवहन व्यवस्था में एक नई क्रांति लाता है।


