देवघर संताल एक्सप्रेस:-विनायक आर्ट गैलरी में कला प्रदर्शनी रंग नृत्य का हुआ शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रदीप भैया महाराज विशिष्ट अतिथि प्रो. रामनंदन सिंह, प्रसिद्ध उद्धोषक व शिक्षाविद रामसेवक सिंह गुंजन थे।प्रदर्शनी का संचालन मशहूर चित्रकार व विनायक आर्ट गैलेरी के संस्थापक मार्कंडेय जजवाड़े के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। पांच अक्टूबर को प्रदर्शनी का विधिवत समापन किया गया।कार्यक्रम संचालन डॉ नीतू ने किया।छात्राओं ने तिलक लगाकर अतिथि का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने माल्यार्पण व पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। इसके बाद अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।साथ ही प्रदर्शनी में मौजूद कला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया व कला की बारिकी से अवगत हुए।
प्रदीप भैया महाराज –
जीवन में हजारों मंच पर मैंने बोला है। स्वयं कथावाचक हूं लेकिन यह मेरे जीवन का पहला अवसर है कि मैं संशय में हूं कि क्या बोला जाए। देवघर में पुटरू जी ही केवल ऐसे व्यक्ति है जिनके बारे में कोई व्यक्ति कोई नकारात्मक नहीं बोला है। यह पुटरू जी की महानता और इनका व्यक्ति है। इन्होंने अपना पूरा जीवन कला को समर्पित कर दिया। जब मनुष्य कोई कलाकृति करता वह नया जन्म देता है वह स्वभाविक रूप से मां का रूप धारण कर लेता है। यहां जितने भी कलाकृति है सबों में कुछ न कुछ संदेश है। देवघर को रंग भरा हुआ बनाने के लिए पुटरू जी ने अभूतपूर्व काम किया है। कला बहुत कठिन साधना होती है। कला ईश्वर की साधना के समान है। जब कलाकार कुचिका को अपने हाथ में रखता है तो वह अपनी कल्पना और सृजनशीलता से नई नई चीजों को जन्म देता है। कला प्रदर्शनी को विजयादशमी तक संचालित किया जाए मेरा आग्रह है।
प्रो. रामनंदन सिंह
प्रदर्शनी में मौजूद कलाकृति को जब मैं देख रहा हूँ तो उसमें मधुर आवाज को सहज अनुभूत किया जा सकता है। कलाकृति जीवंत है। इसमें समाज का दृशन छुपा हुआ है। देवघर नटराज की नगरी है। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं इस दिव्यधरा में पैदा हुआ हूं। देवघर की महिमा अपरंपार है। पुटरू जी शहर के धरोहर है।
रामसेवक सिंह गुंजन –
पुटरू जी कला जगत के अविस्मरणीय व्यक्तित्व है। जब इस गैलेरी की परिकल्पना हुई तो इसमें इनका संघर्ष छुपा हुआ है। एकमात्र ध्येय कलाकारों को अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके। देवघर में ऐसी कोई जगह ही नहीं थी। पुटरू जी ने उन कलाकारों को एक प्लेटफार्म मुहैया कराया है। यह कला जगत के अजातशत्रु है। हर व्यक्ति को किसी न किसी कलाकृति से निश्चित रूप से जुड़ना चाहिए। इससे हमारे अंदर रचनात्मक प्रवृति में वृद्धि होती है। कला एकाग्रता को वृद्धि करती है। शांत और संयमित व्यक्ति का निर्माण करता है। चूकिं देवघर एक जीवंत शहर है इसलिए कला दीर्घा जीवंत बना रहे मेरी कामना है।धन्यवाद ज्ञापन कला दीर्घा के संस्थापक प्रसिद्ध चित्रकार मार्कंडेय जजवाड़े ने किया। उन्होंने कहा कि गैलेरी ने बंद कमरे में बच्चों के चित्रकारी को जीवंत बना दिया है। इस चीज को लिए मैं हमेशा तरसता रहा हूं। यह कमी को अब पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।कार्यक्रम के दौरान युवा चित्रकारों ने भी अपने अनुभव को साझा किया। इस दौरान चित्रकार माधव शर्मा, हेमंत झा,काजल कुमार, मल्लिका कुमारी, मधुमिता दास गुप्ता,वैष्णवी राज,अंजलि,शालिनी ठाकुर,माही कुमारी,राजनंदनी,प्राची प्रिया,ऋचा कौशल,भावना कात्यायन, वेद कुमार, बुलबुल राॅय उपस्थित थे।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


