● एसकेएमयू में एनईपी नोडल अफसरों की बैठक
● सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों को तीन विकल्पों की दी जानकारी
●75% अंक वाले विद्यार्थियों को यूजी ऑनर्स विद रिसर्च में जाने का मिलेगा विकल्प
● एग्जिट लेने वाले विद्यार्थियों को यूजी डिग्री, बाद में री-एंट्री का भी प्रावधान
दुमका। सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्नातक विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए हैं। विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में सोमवार को सभी अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के एनईपी नोडल ऑफिसरों की बैठक हुई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यूजी सेमेस्टर-6 में पास या प्रमोटेड सभी विद्यार्थी चौथे वर्ष की पढ़ाई यानी सेमेस्टर-7 में आगे बढ़ सकते हैं। इसके लिए 75 प्रतिशत अंक की कोई अनिवार्यता नहीं है।
बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अब्दुस सत्तार, डायरेक्टर स्टूडेंट अफेयर्स डॉ. पूनम हेम्ब्रम, एनईपी कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपक कुमार दास समेत सभी अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के नोडल ऑफिसर मौजूद रहे। डायरेक्टर स्टूडेंट अफेयर्स ने विश्वविद्यालय की ओर से जारी एसओपी की जानकारी देते हुए सभी महाविद्यालयों को इसका अनिवार्य रूप से पालन करने का निर्देश दिया।
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सेमेस्टर-6 के बाद तीन विकल्प
एनईपी कोऑर्डिनेटर डॉ. दीपक कुमार दास ने बताया कि सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों के सामने मुख्य रूप से तीन विकल्प हैं। पहला विकल्प एग्जिट का है। विद्यार्थी सेमेस्टर-6 के बाद पढ़ाई से बाहर निकल सकते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें यूजी डिग्री मिलेगी, लेकिन यूजी ऑनर्स की डिग्री नहीं मिलेगी।
दूसरा विकल्प यूजी ऑनर्स के लिए चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रखना है। सेमेस्टर-6 पास या प्रमोटेड विद्यार्थी सेमेस्टर-7 में नामांकन लेकर आगेर्स विद रिसर्च का है। इसके लिए सेमेस्टर-6 तक 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी निर्धारित की पढ़ाई कर सकते हैं। इसके लिए 75 प्रतिशत अंक की शर्त नहीं है।
तीसरा विकल्प यूजी ऑनर्स विद रिसर्च का है। इसके लिए सेमेस्टर-6 तक 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी निर्धारित प्रावधानों के तहत आगे की पढ़ाई कर सकेंगे।
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विद्यार्थियों को सही जानकारी देना जरूरी
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि विद्यार्थियों को सेमेस्टर-6 के बाद उपलब्ध सभी विकल्पों की स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे अपनी रुचि और भविष्य की योजना के अनुसार निर्णय ले सकें। नोडल ऑफिसरों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के बीच एनईपी के प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।
डॉ. दीपक कुमार दास ने विद्यार्थियों को चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि एग्जिट लेने वाले विद्यार्थियों के लिए बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत री-एंट्री का प्रावधान भी है। हालांकि, एग्जिट से पहले विद्यार्थी को अपने महाविद्यालय के माध्यम से विश्वविद्यालय को इसकी सूचना देनी होगी।
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एसओपी और यूजीसी नियमों का पालन अनिवार्य
कुलसचिव डॉ. अब्दुस सत्तार ने नोडल ऑफिसरों को निर्देश दिया कि वे अपने महाविद्यालयों में एनईपी के विकल्पों के साथ-साथ विश्वविद्यालय की एसओपी, सरकार के एनईपी रेगुलेशन और यूजीसी के नियमों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाएं। उन्होंने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्धारित नियमों और एसओपी का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक में डीएसडब्ल्यू कार्यालय के कर्मी मनोज की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।


