
संजीव
गोड्डा: बरसात के मौसम को वैक्टर जनित रोगों के लिए काफी खतरनाक माना गया है। बीमारियों का सर्वाधिक प्रकोप ऐसे महीना में ही होता है। जाहिर है स्वास्थ्य सेवा के लिए अस्पतालों में भीड़ लगनी स्वाभाविक है। ऐसे में लोग बेहतर स्वास्थ्य की कामना लिए सदर अस्पताल की ओर रुख करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य सेवा का हाल सदर अस्पताल में बदहाल है।
बारह हजार मरीजों की प्रतिमाह होती है रिपोर्टिंग
जिले के दूरदराज इलाकों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की कामना को लेकर मरीज सदर अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण इन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया नहीं हो पाता। अस्पताल मैनेजर मोनिका कुमारी की माने तो प्रतिमा तकरीबन 10 से 12000 मरीज के अस्पताल पहुंचाने की रिपोर्टिंग होती है। इनमें से कई तो मामूली बीमारी से ग्रसित होते हैं वहीं कुछ गंभीर बीमारियों वाले मरीज भी पहुंचते हैं जहां चिकित्सकों की कमी के कारण उन्हें बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध करा पाना चुनौती होती है। ऐसी बात नहीं है कि चिकित्सकों की कमी कोई नई बात है गोड्डा सदर अस्पताल में हमेशा योग्य चिकित्सकों की कमी का रोना रोया जाता है।
39 की जगह महज 22 चिकित्सक ही है मौजूद
सदर अस्पताल में सबसे बड़ी कमी चिकित्सकों की है। जहां मानक के अनुरूप चिकित्सक नहीं रहने के कारण आम जनों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पता है्। मामूली मरहम-पट्टी को छोड़कर अस्पताल में और कोई बेहतर सुविधा मरीजों को नहीं मिल पाता। जरा सी गंभीर बात हो तो लोगों को यहां से रेफर का पर्चा ही हाथ में थमाया जाता है। आखिर हो भी क्यों नहीं जिले की 15 लाख से अधिक आबादी वाले इस जिले का एकमात्र सदर अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। जहां लगभग 39 चिकित्सकों की जरूरत के अनुपात में महज 22 चिकित्सक ही मौजूद हैं। उनमें से भी कई विभाग का प्रभार इनके जिम्मे है। ऐसे में देखा जाए तो स्वास्थ्य सेवा का चरमराना वाजिब है।
सदर अस्पताल में एक सर्जन है मौजूद
इधर सर्जन की बात करें तो सदर अस्पताल में महज एक सर्जन डॉक्टर शाहनवाज हसन ही उपलब्ध हैं जो संसाधन के अभाव में कोई बड़ी सर्जरी कर पाना उनके बस की बात नहीं। सर्जरी के लिए एनेस्थीसिया के चिकित्सक के अलावा अन्य कई संसाधनों की जरूरत होती है। जिसका सदर अस्पताल में घोर अभाव है जिसका खामियाजा यहां के मरीजों को भुगतनी पड़ती है।
एक महिला चिकित्सक के भरोसे आधी आबादी
सबसे बुरी स्थिति आदि आबादी यानी महिला मरीजों की है। जहां महज एक महिला चिकित्सक सदर अस्पताल में मौजूद हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक अन्य चिकित्सक सप्ताह में दो दिन साहिबगंज से आकर अपनी सेवा देती हैं। लेकिन वह सदर अस्पताल के लिए नाकाफी है। महज एक महिला चिकित्सक डॉक्टर निर्मला बेसरा ही यहां मौजूद हैं। जिनके जिम्मे महिला मरीजों की सिजेरियन से लेकर चिकित्सा तक की जिम्मेवारी होती है। इधर संस्थागत प्रसव को लेकर लोग काफी जागरूक हुए हैं। लेकिन सरकारी स्तर पर उन्हें कोई बेहतर सुविधा सदर अस्पताल में नहीं मिल पा रही। अस्पताल मैनेजर के अनुसार सदर अस्पताल में गाइनेकोलॉजिस्ट का पद अभी भी खाली है। सदर अस्पताल में गाइनेकोलॉजिस्ट नहीं रहने के कारण महिला मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कई विभागों में नहीं है चिकित्सक
बात करें तो कई स्पेशलिस्ट चिकित्सा सदर अस्पताल में मौजूद नहीं है। इनमें इएनटी , रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया एवं गाइनेकोलॉजिस्ट की कमी है। जिसका सेवा का लाभ यहां के लोगों को नहीं मिलता।
क्या कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक
अस्पताल उपाध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार का कहना है कि चिकित्सकों की कमी सदर अस्पताल की बड़ी समस्या है। बावजूद कम संसाधन के भी बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास किया जाता है। गाइनेकोलॉजिस्ट की कमी के कारण परेशानी होती है। इसके लिए विभाग से लगातार संपर्क किया जा रहा है ताकि जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल को समुचित चिकित्सा के की मुहैया कराई जाए ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके। वही फिलहाल एक सर्जन है सदर अस्पताल में और भी सर्जन की जरूरत हमेशा महसूस होती है। इसके लिए भी विभाग से संपर्क किया गया है। इधर उपयुक्त महोदय डीएमएफटी के तहत भी चिकित्सक की बहाली को लेकर प्रयत्नशील हैं। जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे और चिकित्सकों की कमी को दूर किया जा सकेगा।
डॉ अरविंद कुमार,
अस्पताल उपाधीक्षक, सदर अस्पताल गोड्डा।
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