ब्यूरो रिपोर्ट

दुमका। त्योहारों का सीजन जहां हर घर में खुशियां और उल्लास लेकर आता है, वहीं दुमका के आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों की जिंदगी में इस बार सिर्फ मायूसी छाई हुई है। अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलित इन कर्मियों का धरना शनिवार को 23वें दिन भी जारी रहा। हालात इतने दर्दनाक हो चुके हैं कि दुर्गा पूजा और दीपावली का त्योहार इन कर्मियों के घरों में पूरी तरह सूना बीत गया और अब लोक आस्था के महापर्व छठ पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
इस गंभीर गतिरोध को दूर करने के लिए श्रम अधीक्षक के निर्देश पर सिविल सर्जन और मानव बल आपूर्ति करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसियों की एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को बुलाई गई थी। बैठक में पारा मेडिकल स्टाफ एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी इस उम्मीद के साथ पहुंचे थे कि शायद इस बार उनके हक में कोई फैसला आएगा। लेकिन एजेंसियों के अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने इस उम्मीद पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष के उन दावों को तब और बल मिला जब एजेंसियों ने सिविल सर्जन के आदेशों को पूरी तरह ठेंगे पर रख दिया। एजेंसियों ने न तो प्रशासनिक पत्राचार का कोई जवाब देना मुनासिब समझा और न ही उनके मालिक इस संवेदनशील बैठक में शामिल हुए। हद तो तब हो गई जब श्रम अधीक्षक के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए बालाजी, शिवा प्रोटेक्शन फोर्स और बिरसा सिक्योरिटी जैसी बड़ी एजेंसियों ने केवल अपने सुपरवाइजरों को बैठक में भेज दिया। इन सुपरवाइजरों के पास एजेंसी की तरफ से कोई आधिकारिक अथॉराइजेशन लेटर भी नहीं था, जिसके कारण कर्मियों की बुनियादी और लंबित मांगों पर कोई ठोस बातचीत नहीं हो सकी।
पूरी बैठक में केवल कमांडो इंडस्ट्रियल एजेंसी के मालिक ही उपस्थित हुए, लेकिन उनके दावों और तैयारियों में भी आउटसोर्सिंग कर्मियों की बुनियादी मांगों को लेकर भारी खामियां और विसंगतियां देखने को मिलीं।
सड़क पर बैठे आउटसोर्सिंग स्वास्थ्य कर्मियों की इस दयनीय स्थिति तथा एजेंसियों की मनमानी को देखते हुए श्रम अधीक्षक ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने सभी दोषी एजेंसियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि वे बिना किसी देरी के कर्मियों की इन समस्याओं का तत्काल समाधान करें। साथ ही विभाग और पारामेडिकल स्टाफ एसोसिएशन को लिखित रूप से सूचित करते हुए उन्हें शीघ्र संतुष्ट करें। बहरहाल, प्रशासन की इस सख्ती के बीच अब देखना यह होगा कि क्या इन लाचार कर्मियों के घरों में छठ का दीया जल पाएगा या व्यवस्था की बेरुखी इनके पर्व को भी अंधेरे में धकेल देगी।



