नई दिल्ली । पेट्रोल में एथेनॉल की निर्धारित मात्रा से अधिक मिलावट के दावों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कर्नाटक में पेट्रोल के नमूनों की जांच का हवाला देकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार कर कांग्रेस को ही कठघरे में खड़ा किया है। सांसद दुबे ने वर्ष 2011 में तत्कालीन कांग्रेस की मनमोहन सरकार के दौरान बनाए गए कानून का हवाला देकर कर्नाटक सरकार से जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल, राहुल गांधी ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार ने सात जिलों से पेट्रोल के 14 नमूने एकत्र कर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में उनकी जांच करवा दी। जांच में 11 नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक मिली। राहुल गांधी के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसीएल) के एक नमूने में 31.2 प्रतिशत और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) के एक नमूने में 30.5 प्रतिशत एथेनॉल मिला।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने से वाहनों के माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि देश में पेट्रोल के अंदर वास्तव में कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने पूछा कि निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल मिलने पर संबंधित तेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कब की जाएगी।
इसके बाद राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पलटवार कर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में पेट्रोल की गुणवत्ता और कथित मिलावट को लेकर जवाबदेही राज्य सरकार की बनती है। सांसद दुबे ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वह लगातार केंद्र सरकार पर सवाल उठाने के बजाय कर्नाटक के मुख्यमंत्री से जवाब मांगें और कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बीजेपी सांसद दुबे ने अपने बयान में वर्ष 2011 के कानून का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से संबंधित व्यवस्था कांग्रेस शासनकाल में ही बनाई गई थी। इसके बाद राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी की सरकार से जवाब मांगना चाहिए। फिलहाल पेट्रोल के नमूनों की जांच से जुड़े दावों ने एथेनॉल मिश्रण की गुणवत्ता, निर्धारित मानकों और तेल कंपनियों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर संबंधित जांच रिपोर्ट और केंद्र तथा कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया पर है।




