नई दिल्ली । दीपावली के पावन अवसर पर जब चारों तरफ खुशियों का माहौल हो और सामने मिठाइयों से सजी प्लेट रखी हो, तो खुद को रोक पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता। हालांकि, डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए यह त्योहार थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्हें हर बार मीठा खाने से पहले यह चिंता सताती है कि कहीं इससे उनका ब्लड शुगर लेवल अचानक न बढ़ जाए। लेकिन जानकारों के अनुसार, डायबिटीज होने का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि त्योहार पर स्वाद से पूरी तरह दूरी बना ली जाए। सही विकल्प चुनकर, खानपान की मात्रा पर नियंत्रण रखकर और कुछ बुनियादी सावधानियां बरतकर डायबिटीज के मरीज भी दीपावली की खुशियों में शामिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को बाजार की अत्यधिक चाशनी वाली पारंपरिक मिठाइयों के बजाय मेवों जैसे बादाम, अखरोट और पिस्ता से बनी मिठाइयों का चयन करना चाहिए। बादाम कतली, पिस्ता रोल या कम चीनी में तैयार की गई मेवों की मिठाइयां अन्य मिठाइयों की तुलना में बेहतर विकल्प साबित होती हैं। बादाम और पिस्ता में प्रचुर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन और स्वास्थ्यवर्धक वसा पाई जाती है। ये पोषक तत्व पाचन की गति को धीमा करते हैं, जिससे खून में शर्करा का स्तर एकदम से नहीं बढ़ता। इसके अलावा, घर पर मिठाइयां तैयार करना एक सबसे सुरक्षित तरीका है, क्योंकि इससे मिठाई में इस्तेमाल होने वाले घी, दूध और मिठास की मात्रा पर पूरा नियंत्रण रहता है। घर पर प्राकृतिक स्वीटनर का इस्तेमाल विशेषज्ञों की सलाह पर किया जा सकता है।
मिठाई के चुनाव के साथ-साथ उसे खाने के तरीके और समय का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। खाली पेट मिठाई खाने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि मुख्य संतुलित भोजन के साथ ही थोड़ी मात्रा में मिठाई ली जाए। भोजन में हरी सब्जियां, दालें, सलाद और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करने से रक्त में ग्लूकोज के अवशोषण की गति धीमी हो जाती है। एक बार में मिठाई का छोटा टुकड़ा ही लें और दिनभर में अन्य कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थों की मात्रा कम रखें।
बाजार में मिलने वाली तथाकथित शुगर-फ्री मिठाइयों को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है। भले ही इनमें चीनी न हो, लेकिन इनमें मैदा, खोया और अन्य उच्च कैलोरी वाली सामग्री हो सकती है, जो ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकती है। त्योहार की व्यस्तता के बीच अपनी दवाइयां समय पर लेना और नियमित ब्लड शुगर की जांच करना न भूलें। भोजन के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की चहलकदमी भी शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में काफी मददगार साबित होती है।




