कुंडहित (जामताड़ा) भाई-बहन की स्नेह और प्रेम की बंधन के रुप मे मनाये जाने वाली सात दिवसीय करमा पुर्व कुंडहित प्रखंड के पुतुलबोनो सहित विभिन्न गावों मे धुमधाम के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशाी तिथि को मनाया जाता है। सोमवार को ब्रतियों ने गांव के सामने नदी-तालाब से डाली मे बालु उठाकर उसमे नोै प्रकार की बीज डाले। इस दौरान पुतुलबोना गांव के पुजा मिर्धा, रिंकी मिर्धा, पायेल मिर्धा, पुर्णिमा मिर्धा, रीया मिर्धा, बाबली मिर्धा, लाबली मिर्धा, मामता मिर्धा, आदरी मिर्धा, एकावती मुर्मू, पद्वावती मुर्मू, अंजना टुडु सहित दर्जनो महिलाओ ने बताया सात दिवसीय भाई- बहन की स्नेह और प्रेम की पर्व सोमवार से शुरु किया गया है। जो आगामी सोमवार को समापन यानी पारणा किया जायेगा।
क्या कहते महिलाओः- महिलाओं ने बतायी यह पर्व बहनों ने अपने भाई की लम्बी आयु तथा सुख समृद्वी के कामना के लिये यह पर्व मनाया जाती है। इसके बदले मे भाई ने बहनों को नया बस्त्र देकर सम्मान किया जाता है। यह पर्व के पहले भाई ने सभी बहनो को अपने घर बुलाते है। इस दौरान महिलाओ ने करमा पर्व के इतिहास के बारे मे बताते हुए कहा की कर्मा और धर्मा नामक दो भाइयों ने अपने बहन की रक्षा के लिये जान को दाव पर लगा दिया था। दोनो भाई गरीब थें और उनकी बहन भगवान से हमेशा सुख समृद्वी के लिये तप करती थी। बहन के तप के बल पर ही दोनो भाइयों के घर मे सुख समृद्वी आयी थी। बहन की यहसास के बदले मे दोनो भाइयों ने दुशमनों से बहन की रक्षा के लिये जान तक गवा दी थी। इस घटना के बाद से इस पर्व की मनाने की परम्परा शुरु हुई। बाहरहाल करमा त्योहार को लेकर गांव- गांव में उत्सब का माहोैल व्याप्त है।
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