– अब तक 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर कार्रवाई का दावा
– विदेशी निवेश और फंड ट्रांसफर की भी जांच
मुंबई । देश के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई जारी है। ताजा कार्रवाई में ईडी ने रिलायंस पावर लिमिटेड की भारत में स्थित 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) की धारा 37ए के तहत की गई है। जब्त संपत्तियों में रिलायंस पावर के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में हिस्सेदारी शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी समूह से जुड़े वित्तीय लेन-देन और विदेशों में किए गए निवेश को लेकर जांच फिर चर्चा में आ गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईडी इस मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली जानकारी के आधार पर भी जांच कर रही है। हालांकि, जांच के दौरान लगाए गए आरोपों और अंतिम रूप से साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
– विदेशी निवेश और फंड ट्रांसफर की जांच
जांच एजेंसी को कथित तौर पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स में स्थित कंपनियों के साथ किए गए विदेशी निवेश तथा अग्रिम भुगतान से जुड़े लेन-देन की जांच करनी है। इन लेन-देन में धन के वास्तविक उपयोग और संबंधित कंपनियों के नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोपों के अनुसार, वर्ष 2006 में रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड ने विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के जरिए 300 मिलियन डॉलर जुटाए थे। इसमें से 275 मिलियन डॉलर सिंगापुर स्थित एक सहायक कंपनी में निवेश किए जाने का आरोप है। इसके बाद इस धनराशि के आधार पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में स्थित कंपनियों को कर्ज दिए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन कंपनियों का वास्तविक नियंत्रण किसके पास था और धन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
– 2,101 करोड़ रुपये के राइट-ऑफ और प्रावधानों की भी पड़ताल
कंपनी के खातों में 2,101.46 करोड़ रुपये के राइट-ऑफ और वित्तीय प्रावधान दर्ज किए जाने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा, मॉरिशस स्थित विदेशी संस्थाओं के माध्यम से कथित तौर पर धन को अस्थायी रूप से भारत वापस लाने और शेष राशि विदेश में रखने के आरोपों की पड़ताल हो रही है। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि कर्ज की अदायगी नहीं होने के बाद कुछ लेन-देन को वैध व्यावसायिक गतिविधि के रूप में दिखाने के लिए पिछली तारीख के दस्तावेज तैयार किए गए। इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी निर्धारित करना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
– पहले भी 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त होने का दावा
अनिल अंबानी समूह से जुड़े मामलों में ईडी पहले भी कार्रवाई कर चुकी है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, नवंबर 2025 में रिलायंस समूह से संबंधित आर्थिक अनियमितताओं की जांच के दौरान करीब 1,400 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले की कार्रवाइयों को मिलाकर अनिल अंबानी समूह से संबंधित 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर कार्रवाई होने का दावा किया गया है। ताजा कार्रवाई के बाद विदेशी निवेश, बैंक खातों और कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन की जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। अब जांच एजेंसी का ध्यान कथित वित्तीय अनियमितताओं, धन के स्रोत और उसके अंतिम इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने पर रहेगा।


