बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी, चार सप्ताह में मांगा जवाब
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने राहत प्रदान की है। शीर्ष अदालत ने मामले में निचली अदालत में चल रहे ट्रायल पर रोक लगा दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली राहुल गांधी की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें मानहानि की शिकायत को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। अदालत ने संबंधित पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
यह मामला राहुल गांधी की उन कथित टिप्पणियों से जुड़ा है, जिनमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए कथित तौर पर ‘चोरों का सरदार’ और ‘कमांडर-इन-थीफ’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन टिप्पणियों से प्रधानमंत्री के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी और उसके सदस्यों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। मामले की शुरुआत बीजेपी कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल की शिकायत से हुई थी। उन्होंने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। मजिस्ट्रेट ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था।
राहुल गांधी ने समन को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी टिप्पणी में किसी निश्चित व्यक्ति या पहचान योग्य वर्ग का नाम नहीं लिया था। ऐसे में किसी स्पष्ट पीड़ित व्यक्ति या समूह के अभाव में शिकायतकर्ता को मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से किया था इनकार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि शिकायतकर्ता दो दशकों से बीजेपी का सक्रिय सदस्य होने का दावा करता है। विवादित टिप्पणी और शिकायत के तथ्यों को देखते हुए शुरुआती चरण में यह नहीं कहा जा सकता कि बयान केवल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित था। टिप्पणी का वास्तविक आशय और पार्टी सदस्यों पर उसका प्रभाव ट्रायल के दौरान तय किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में शशि थरूर से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया था। उस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि पंजीकृत राजनीतिक पार्टी एक पहचान योग्य और निश्चित संस्था हो सकती है। राहुल गांधी ने हाईकोर्ट के आठ सितंबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत ने अब इस याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब करते हुए ट्रायल पर रोक लगा दी है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और पक्षकारों के जवाब पर निर्भर करेगी।


