ब्यूरो
रांची /दुमका। झारखंड की सियासत और सोरेन परिवार के लिए बुधवार की शाम एक बेहद दुखद खबर लेकर आई। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की धर्मपत्नी रूपी सोरेन का देर शाम निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि डॉ. दीपक गुप्ता और डॉ. उज्जवल राय ने की है। इस मनहूस खबर के सामने आते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री आवास की ओर पारिवारिक मित्रों, नेताओं और समर्थकों के कदम भारी मन से बढ़ने लगे हैं।
रूपी सोरेन केवल एक राजनेता की पत्नी या मुख्यमंत्री की मां भर नहीं थीं, बल्कि वे शिबू सोरेन के उस लंबे राजनीतिक और पारिवारिक संघर्ष की सबसे मजबूत साथी थीं, जिसने अलग झारखंड राज्य के सपने को साकार किया। उनके इस दुनिया से चले जाने से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत पूरे परिवार को एक गहरा और अपूरणीय आघात लगा है। राज्य भर के झामुमो कार्यकर्ता शोकाकुल हैं और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर वर्ग के लोग इस दुख की घड़ी में सोरेन परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं।
राजनीति के उतार-चढ़ाव को करीब से देखने वाली रूपी सोरेन ने प्रत्यक्ष तौर पर भी चुनावी अखाड़े में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। साल 1999 के 13वें लोकसभा चुनाव में उन्होंने झामुमो के टिकट पर दुमका लोकसभा सीट से ताल ठोकी थी। उस चुनाव में उनका सीधा और कड़ा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के बाबूलाल मरांडी से हुआ था। उस बेहद रोमांचक मुकाबले में रूपी सोरेन ने जनता का भरपूर प्यार बटोरते हुए 1,96,493 वोट हासिल किए थे। हालांकि, बाबूलाल मरांडी ने 2,01,141 वोट पाकर महज 4,648 वोटों के करीबी अंतर से वह चुनाव जीत लिया था, लेकिन रूपी सोरेन ने अपनी मजबूत राजनीतिक छाप छोड़ी थी।
परिवार की ओर से फिलहाल रूपी सोरेन के अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की तिथि, समय और स्थान को लेकर आधिकारिक जानकारी जल्द ही साझा की जाएगी। उनके अंतिम सफर में राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों के भारी हुजूम के उमड़ने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने भी अपनी ओर से सुरक्षा और यातायात की चाक-चौबंद व्यवस्था शुरू कर दी है। आज झारखंड ने अपनी एक वरिष्ठ और संघर्षशील महिला को खो दिया है, जिससे पूरे सूबे के सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा पसर गया है।


