आईओ ने चार्जशीट से नार्को टेस्ट गुम किया
कवि कुमार
जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित पॉक्सो कानून की विशेष अदालत में वर्ष 2018 के एक बहुचर्चित मामले में नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य एवं महत्वपूर्ण गवाह नानक चंद सेठ ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 294 के तहत अदालत में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में जांच एजेंसी द्वारा अदालत में दाखिल आरोप पत्र (चार्जशीट) की निष्पक्षता और सत्यता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही इस वेश्यावृत्ति और बलात्कार कांड के मुख्य गवाह नानक चंद सेठ ने आवेदन देकर फॉरेंसिक सबूत और फोन रिकॉर्डिंग रिकॉर्ड पर लेने की गुहार लगाई है।
चार्जशीट और फॉरेंसिक रिपोर्ट का टकराव
अदालत के समक्ष दाखिल याचिका में गवाह नानक चंद सेठ ने कहा है कि पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट में दर्ज किया गया है कि इस मामले में अभियुक्तों का नार्को-एनालिसिस टेस्ट नहीं कराया गया है और इसके कई कारण बताए गए थे। हालांकि, नानक चंद सेठ का दावा है कि फॉरेंसिक साइंस निदेशालय के सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर और सत्यापन वाली नार्को-एनालिसिस रिपोर्ट वास्तव में मौजूद है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि जब फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट अस्तित्व में है, तो चार्जशीट में यह कहना कि टेस्ट हुआ ही नहीं, कोई मामूली चूक या त्रुटि नहीं है। यह जानबूझकर किया गया एक गंभीर विरोधाभास है, जो पूरी जांच प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा (Judicial Scrutiny) की मांग करता है।
कॉल रिकॉर्डिंग में न्याय प्रणाली में हस्तक्षेप का आरोप
याचिका में गवाह ने न केवल फॉरेंसिक रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों की प्रति रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया है, बल्कि एक ऑडियो टेप की ट्रांसक्रिप्ट भी सौंपी है। यह रिकॉर्डिंग मामले की एक अन्य महत्वपूर्ण गवाह ममता सेठ की बातचीत की बताई जा रही है।
मुख्य गवाह नानक चंद सेठ के दावे के मुताबिक, बातचीत के दौरान गवाह ने यह बात स्वीकार की है कि आरोपियों ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने तथा उच्च न्यायालय और वरिष्ठ न्यायिक प्राधिकारियों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया है। हालांकि, आवेदक ने स्पष्ट किया है कि वह केवल इस सामग्री को अदालत के संज्ञान में लाना चाहता है ताकि इसकी प्रामाणिकता, आवाज की पहचान और कानूनी ग्राह्यता (Admissibility) की निष्पक्ष जांच हो सके।
आवेदक की न्यायालय से प्रार्थना
नानक चंद सेठ ने अदालत से प्रार्थना की है कि इस मामले में नार्को रिपोर्ट शामिल की जाए। चार्जशीट के दावों के विपरीत, फॉरेंसिक साइंस निदेशालय द्वारा हस्ताक्षरित नार्को-एनालिसिस रिपोर्ट को न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए।
पीड़िता के बयान व फॉरेंसिक साक्ष्य
पीड़िता के बयानों का फॉरेंसिक रिपोर्ट के साथ मिलानकर कर उनका न्यायिक परीक्षण किया जाए।
कॉल रिकॉर्डिंग का सत्यापन
ममता सेठ की फोन वार्ता के टेप/ट्रांसक्रिप्ट को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा जाए और उसकी सत्यता की जांच की जाए। नानक चंद सेठ की ओर से यह भी कहा गया है कि आपराधिक न्याय का उद्देश्य किसी पक्ष विशेष को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि सत्य तक पहुंचना है। साक्ष्यों को प्रक्रिया की शुरुआत में ही दबा देने से न्याय प्रभावित हो सकता है। अब इस मामले में कोर्ट के आगामी रुख और जांच एजेंसी के जवाब पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।


