नई दिल्ली । एंटीबायोटिक को बार-बार लेने से शरीर की इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। लोगों में यह एक आम धारणा है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, सीधे तौर पर एंटीबायोटिक को इम्यून सिस्टम कमजोर करने वाली दवा कहना सही नहीं है। इन दवाओं का मुख्य काम बैक्टीरिया से होने वाले कुछ संक्रमणों का इलाज करना है। हालांकि, जरूरत न होने पर या बार-बार एंटीबायोटिक लेने से शरीर पर कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं और सबसे बड़ी चिंता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की होती है। \एंटीबायोटिक का इस्तेमाल डॉक्टर मरीज की बीमारी और संक्रमण की स्थिति को देखते हुए करते हैं। बिना जरूरत इनके सेवन से आंतों में मौजूद सामान्य बैक्टीरिया के संतुलन पर असर पड़ सकता है। शरीर में मौजूद यह माइक्रोबायोम पाचन समेत कई सामान्य शारीरिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।
इसलिए एंटीबायोटिक को सामान्य बुखार, सर्दी-जुकाम या इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवा समझकर लेना उचित नहीं है। बार-बार या गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने पर पेट दर्द, मतली, दस्त और कुछ मामलों में एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा आंतों के सामान्य बैक्टीरिया के संतुलन में बदलाव भी हो सकता है। हर व्यक्ति में इन दवाओं का असर और दुष्प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ी चिंता एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की है। जब बैक्टीरिया बार-बार एंटीबायोटिक के संपर्क में आते हैं, तो उनमें ऐसी क्षमता विकसित हो सकती है जिससे कुछ दवाएं उन पर पहले की तरह प्रभावी नहीं रहतीं। ऐसी स्थिति में संक्रमण का इलाज मुश्किल हो सकता है और डॉक्टर को दूसरी या अधिक उपयुक्त दवा का सहारा लेना पड़ सकता है। यही वजह है कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल सही बीमारी में, सही दवा और डॉक्टर द्वारा निर्धारित अवधि तक करना जरूरी है।
हर बुखार या सर्दी-जुकाम में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। सामान्य सर्दी-जुकाम के कई मामले वायरस के कारण होते हैं, जबकि एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के खिलाफ काम करती हैं। ऐसे में खुद से एंटीबायोटिक लेने से बीमारी में फायदा नहीं होता, बल्कि अनावश्यक दवा के दुष्प्रभाव और रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। यदि डॉक्टर ने एंटीबायोटिक लिखी है तो उसे निर्धारित मात्रा और अवधि के अनुसार लेना चाहिए। दवा की खुराक खुद से कम-ज्यादा करने या इलाज बीच में रोकने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। दवा लेने के बाद गंभीर दुष्प्रभाव हों या बीमारी में सुधार न हो तो भी चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।


