नई दिल्ली । आजकल बगैर डॉक्टरी सलाह के दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल बेहद आम हो गया है। सिरदर्द, कमर दर्द, जोड़ों में दर्द या बुखार जैसी छोटी-बड़ी परेशानियों में कई लोग डॉक्टर की सलाह लेने के बजाय खुद ही दवा खा लेते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार पेनकिलर लेना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 31 वर्षीय नंदराम ने एक महीने के दौरान 13 पेनकिलर गोलियां खाईं, जिसके बाद उनकी दोनों किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हो गईं और इंदौर में उनका किडनी ट्रांसप्लांट करना पड़ा। पेनकिलर दर्द की मूल वजह को हमेशा खत्म नहीं करतीं, बल्कि दर्द के संकेतों और शरीर में बनने वाले कुछ रसायनों की गतिविधि को कम करके अस्थायी राहत देती हैं। चोट या सूजन होने पर शरीर प्रोस्टाग्लैंडिन नामक रसायन बनाता है, जो दर्द और सूजन से जुड़े संकेतों को बढ़ाने में भूमिका निभाता है। कुछ दर्द निवारक दवाएं इन रसायनों के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं, जिससे दर्द, सूजन और बुखार में राहत महसूस हो सकती है। हालांकि, जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक कुछ पेनकिलर लेने से किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ये दवाएं किडनी तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। लगातार या गलत तरीके से इनके सेवन से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, उनमें इस तरह के जोखिम अधिक हो सकते हैं।
कुछ दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक सेवन लिवर पर भी असर डाल सकता है। अलग-अलग पेनकिलर के जोखिम अलग होते हैं और उनकी सुरक्षित खुराक भी अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी दवा को सामान्य समझकर बार-बार लेना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार, दर्द की दवा लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। दवा हमेशा निर्धारित मात्रा में ही लेनी चाहिए और अलग-अलग दवाओं में मौजूद एक ही सक्रिय तत्व की अनजाने में दोहरी खुराक लेने से बचना चाहिए। दवा लेने के बाद पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव, शरीर में सूजन, अत्यधिक कमजोरी, मतली या असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। पर्याप्त पानी पीना और अपनी पुरानी बीमारियों की जानकारी डॉक्टर को देना भी जरूरी है।


