◆प्रशासन के निशाने पर बीरभूम जिले में कई स्टोन क्रशर भी
◆टुलु मंडल प्रकरण के बाद प्रशासन की कार्रवाई, मोहम्मद बाजार से रामपुरहाट तक हुई जांच
विशेष संवाददाता
दुमका। पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिला प्रशासन ने जिले की अवैध पत्थर खदानों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। टुलु मंडल से जुड़े कथित अवैध पत्थर कारोबार की चल रही जांच के बीच प्रशासन ने मोहम्मद बाजार और रामपुरहाट इलाके की आठ पत्थर खदानों को बंद करने का नोटिस जारी किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, मोहम्मद बाजार ब्लॉक के भूमि एवं भूमि सुधार पदाधिकारी आनंद विश्वास के नेतृत्व में देवांगंज मौजा में कार्रवाई की गयी। वहां टुलु मंडल के रिश्तेदार अपेल मोर्तजा की खदान पर बंदी का नोटिस लगाया गया। इसके अलावा मनोज टुडू, शेख करिबुल, सरताज मोल्ला, सुनील सोरेन और शुभधन टुडू से जुड़ी खदानों के खिलाफ भी कार्रवाई की गयी। चांदा मौजा में तारक टुडू और अनिल किस्कू तथा हाटगाछा मौजा में बुधन मारांडी की खदानों पर भी प्रशासनिक कार्रवाई की सूचना है।रामपुरहाट-1 इलाके में भी चार पत्थर खदानों को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। जिन 8 पत्थर खदानों को बंदी का नोटिस दिया गया हैं,उन खदानों के बिना वैध लाइसेंस संचालित होने की सूचना प्रशासन को थी।बता दें कि पिछले महीने भी मोहम्मद बाजार इलाके की नौ खदानों को इसी तरह के नोटिस दिए गए थे। कुछ खदानों में नोटिस के बाद भी अवैध रूप से खनन का काम जारी रहने की शिकायत सामने आयी है।
बीरभूम जिला प्रशासन द्वारा पत्थर खदानों को बंद करने की इस कार्रवाई का असर सीमावर्ती दुमका जिला के पत्थर मंडी पर पड़ने की आशंका है।बीरभूम प्रशासन की कार्रवाई से वहां की क्रशर यूनिटों को बोल्डर की कमी होना तय है।ऐसी स्थिति में दुमका जिला के शिकारीपाड़ा इलाके के पत्थर खदानों से उत्पादित बोल्डर की ढुलाई की विशेष निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। बीरभूम में खदानों के साथ पत्थर क्रशर उद्योग भी प्रशासन और पर्यावरणीय नियामकों के निशाने पर है।बता दें कि पिछले वर्ष भी एनजीटी के आदेश के बाद बीरभूम प्रशासन ने कई स्टोन क्रशर यूनिट को नोटिस जारी किया गया था।


