◆जेपीएससी नियुक्ति मामले में गिरफ्तार आयोग के पूर्व अध्यक्ष ख्यांगते दो बार रहे संताल परगना के कमिश्नर
◆चारा घोटाले से लेकर दवा खरीद में वित्तीय अनियमितता तक, चार अन्य पूर्व कमिश्नर भी जा चुके हैं जेल
डॉ.सुमन सिंह
दुमका । सीनियर आईएएस अधिकारी एल. ख्यांगते संताल परगना के ऐसे पांचवें पूर्व प्रमंडलीय आयुक्त हैं, जिन्हें अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। दो दिन पहले जेपीएससी में कथित नियुक्ति घोटाले के मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।इस सूची में बेक जूलियस और एस.एन. दुबे का नाम चारा घोटाले से, सियाराम प्रसाद सिन्हा का नाम दवा घोटाले से और डॉ. प्रदीप कुमार का नाम दवा एवं चिकित्सा उपकरणों की खरीद में वित्तीय अनियमितता के मामले से जुड़ा रहा है। अब एल. ख्यांगते का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है।
ख्यांगते संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त के पद पर दो बार रह चुके हैं।एल. ख्यांगते पहली बार 21 अगस्त 2011 से 16 अक्टूबर 2011 तक और दूसरी बार 20 जुलाई 2015 से 15 सितंबर 2015 तक संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त रहे थे। हाल में एक मामले में उनकी गिरफ्तारी के बाद संताल परगना में आयुक्त के रूप में कार्य कर चुके उन पूर्व आईएएस अधिकारियों की चर्चा तेज हो गई है, जो बाद में विभिन्न मामलों में कानूनी कार्रवाई के दायरे में आए और जेल गए।
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बेक जूलियस चारा घोटाले में गए थे जेल
संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त रह चुके आईएएस अधिकारी बेक जूलियस का नाम चारा घोटाले से जुड़ा रहा है। वे 5 अगस्त 1988 से 3 अक्टूबर 1991 तक संताल परगना के कमिश्नर रहे थे। वर्ष 1996 में चारा घोटाले के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस समय अविभाजित बिहार सरकार के पशुपालन विभाग में वे सचिव के पद पर रहे थे। उनके कार्यकाल के दौरान पशुपालन विभाग में हुए चारा घोटाले की जांच में उनका नाम सामने आया था।
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चारा घोटाले में एसएन दुबे की भी हुई थी गिरफ्तारी
चारा घोटाले के मामले में ही संताल परगना के एक अन्य पूर्व कमिश्नर एस.एन. दुबे को भी गिरफ्तार किया गया था। वे 24 जनवरी 1994 से 30 जून 1995 तक संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त रहे थे। चारा घोटाले की जांच के दौरान उनकी गिरफ्तारी हुई थी।
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दवा घोटाले में फंसे सियाराम प्रसाद सिन्हा
संताल परगना के एक अन्य पूर्व आयुक्त सियाराम प्रसाद सिन्हा भी बाद में घोटाले के मामले में कानूनी कार्रवाई के दायरे में आए। वे 11 अगस्त 2005 से 30 मई 2007 तक संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त रहे थे। दवा घोटाले के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया और जेल जाना पड़ा था।
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दवा व चिकित्सा उपकरण खरीद मामले में डॉ. प्रदीप कुमार गए थे जेल
डॉ. प्रदीप कुमार भी संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त रह चुके हैं और दवा तथा चिकित्सा उपकरणों की खरीद में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जेल जा चुके हैं। वे यहां तीन बार प्रमंडलीय आयुक्त रहे।पहली बार वे 29 नवंबर 2016 से 16 जनवरी 2017 तक आयुक्त रहे। इसके बाद 19 जून 2017 से 7 जून 2018 तक उन्होंने फिर संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली। तीसरी बार वे 18 जून 2018 से 31 जुलाई 2018 तक इस पद पर रहे।
एल. ख्यांगते की गिरफ्तारी के बाद संताल परगना के पूर्व प्रमंडलीय आयुक्तों का यह रिकॉर्ड प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।


