नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बुलडोजर कार्रवाई पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि कानून के लिए बुलडोजर चल सकता है, लेकिन इसका उपयोग चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि उसके पहले के फैसले में सभी बुलडोजर कार्रवाइयों पर रोक नहीं लगाई गई थी, बल्कि यह सुनिश्चित किया गया था कि तोड़-फोड़ की कार्रवाई कानून और संविधान के दायरे में ही हो। यह टिप्पणी मनमाने ढंग से बुलडोजर एक्शन के आरोपों वाली अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि हर बुलडोजर एक्शन की वैधता की जांच उसके अपने तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए और ऐसे मामलों की जांच के लिए हाईकोर्ट ही सही जगह हैं।
बेंच ने अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि उठाए गए मुद्दों में तथ्यों से जुड़े विवादित सवाल शामिल हैं, जिनकी विस्तार से जांच की आवश्यकता है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल सही हो सकता है, विशेषकर जब अधिकारियों और अवैध कब्जा करने वालों की मिलीभगत से कानून का शासन कमजोर हो रहा हो। हालांकि, उन्होंने भेदभावपूर्ण तरीके से इसके इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि कानून लागू करने के नाम पर लोगों की छवि खराब नहीं की जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जोर दिया कि किसी भी विध्वंस यानी तोड़-फोड़ के मामले में मुख्य मुद्दा यह होता है कि क्या वह ढांचा कानूनी रूप से अधिकृत था और क्या अधिकारियों ने कार्रवाई करने से पहले तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 (संभवतः 2023 या पहले का संदर्भ) के फैसले में तय सुरक्षा उपायों का उल्लंघन किया है।
हालांकि, बेंच ने कहा कि उन आरोपों के लिए तथ्यों की जांच जरूरी है, इसलिए यह जांचने के लिए कि क्या उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था, हाई कोर्ट ही सही मंच हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित याचिकाओं को संबंधित हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया, और यह स्पष्ट किया कि उसके पूर्व के फैसले को उसमें बताए गए अपवादों के साथ पढ़ा जाना चाहिए, न कि किसी अलग कानूनी प्रावधान के तौर पर। बेंच ने यह भी कहा कि बुलडोजर एक्शन के अलग-अलग मामलों में तथ्यों से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए अवमानना की कार्यवाही सही तरीका नहीं है।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुनवाई के दौरान विभिन्न मामलों का हवाला दिया, जिसमें सोमनाथ में मस्जिदों को गिराए जाने और महाराष्ट्र में स्थानीय नेताओं द्वारा बुलडोजर कार्रवाई का आह्वान करने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शामिल थी। सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को संपत्तियों को गिराने के मामले में देशभर के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें कहा गया था कि कार्यपालिका जज की भूमिका नहीं निभा सकती, किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती और उसका घर नहीं गिरा सकती। इन दिशानिर्देशों में कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना किसी भी संपत्ति को गिराने पर रोक लगाई गई थी।


