अयोध्या । राम मंदिर दान चोरी मामले में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जिसमें शेयर मार्केट से लेकर कई अन्य लिंक सामने आ रहे हैं। अब तक इस मामले में आठ लोगों पर पुलिस की तलवार लटक चुकी है और नए नाम भी सामने आ रहे हैं। लेकिन इस बड़े घोटाले का खुलासा किसी शिकायत से नहीं, बल्कि एक साधारण चौकीदार की ईमानदारी से हुआ। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मई के अंतिम सप्ताह में मंदिर परिसर के एक बाथरूम में करीब 40 हजार रुपये की नकदी छिपाकर रखी गई थी। गेट पर तैनात एक गार्ड की नजर इस पर पड़ी और उसने तुरंत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक ट्रस्टी को इसकी सूचना दी।
गार्ड की सूचना मिलते ही ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी मंदिर पहुंचे और उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों व अन्य ट्रस्टियों को इस बारे में जानकारी दी।
शुरुआती जांच में ही दान पेटियों से आने वाली नकदी में भारी गड़बड़ी की आशंका सामने आ गई। इसके बाद ट्रस्ट ने पहले एक आंतरिक जांच शुरू की और फिर 4 जून को जिला प्रशासन को पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दी, जिसके बाद औपचारिक आपराधिक जांच का रास्ता खुल गया। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सूचना मिलने के बाद 21 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। इस टीम ने दान गिनने की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की, संबंधित कर्मचारियों से गहन पूछताछ की और पुलिस को आवश्यक जानकारी प्रदान की, जिसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई। ट्रस्ट की शिकायत के बाद पुलिस ने दान गिनने वाले केंद्र से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर अयोध्या के अलावा बहराइच, प्रतापगढ़ समेत कई जिलों में एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की गई।
शिकायत दर्ज होने के महज 17 घंटे के भीतर पुलिस और ट्रस्ट की संयुक्त टीम ने लगभग 80 लाख रुपये नकद बरामद कर लिए। जांच के दौरान बहराइच के नानपारा में आरोपी रमाशंकर मिश्रा के घर, प्रतापगढ़ के कुंडा में आरोपी अविनाश शुक्ला के पैतृक आवास और अन्य ठिकानों पर तलाशी ली गई। इसके अतिरिक्त, आरोपी अनुकल्प मिश्रा, उसके रिश्तेदार लवकुश मिश्रा और अयोध्या के नाका निवासी करुणेश की निशानदेही पर भी नकदी और कुछ आभूषण बरामद किए गए। अब इस पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है। जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि दान की रकम का गबन कैसे किया जाता था, इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, और यह खेल कितने समय से चल रहा था। एसआईटी दान की नकदी के संग्रह से लेकर गिनती केंद्र तक पहुंच, कर्मचारियों की गतिविधियों और चोरी की रकम को छिपाने व बाहर ले जाने के पूरे तरीके की कड़ियों को जोड़ने में लगी है, ताकि इस बड़े घोटाले के सभी दोषियों को बेनकाब किया जा सके।


