नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग कई बार बल्लेबाजी के दौरान अक्सर गाने गुनगुनाया करते थे। सहवाग का कहना है कि वह ऐसा दबाव से मुक्त रहकर अपने अंदाज में खेलने के लिए करते थे। सहवाग ने यह भी कहा कि एक बार पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान, एक खिलाड़ी ने उनसे बल्लेबाजी करते हुए महान गायक किशोर कुमार का गीत सुनाने की की अनोखी फरमाइश कर दी थी। यह वाकया उनके अनोखे अंदाज और खेल के प्रति सहज दृष्टिकोण को दर्शाता है।
सहवाग ने बताया कि यह घटना वर्ष 2005 में बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले गए भारत और पाकिस्तान के बीच टेस्ट सीरीज के निर्णायक मुकाबले की है। सहवाग उस मैच में डेढ़ सौ से अधिक रन बनाकर खेल रहे थे। उन्होंने बताया कि इसी दौरान शॉर्ट लेग पर फील्डिंग कर रहे पाकिस्तान के बल्लेबाज यासिर हमीद उनके पास आए और जिज्ञासावश पूछा कि क्या वह वाकई बल्लेबाजी करते समय गाना गाते हैं। जब सहवाग ने मुस्कुराते हुए इसकी पुष्टि की, तो यासिर ने उनसे महान गायक किशोर कुमार का कोई गीत सुनाने की इच्छा व्यक्त की। सहवाग ने बताया कि उन्होंने उनकी इस फरमाइश को पूरी सहजता से पूरा किया और बल्लेबाजी के साथ-साथ गीत भी गुनगुनाते रहे, जो मैदान पर खिलाड़ियों के बीच सौहार्द का एक अनूठा उदाहरण बन गया।
सहवाग के अनुसार, संगीत उनके खेल का एक अभिन्न अंग था। उनका सबसे पसंदीदा गीत किशोर कुमार का सदाबहार गाना ‘चला जाता हूं किसी की धुन में, धड़कते दिल के तराने लिए’ था। सहवाग ने बताया कि यह गीत उनका मूड हमेशा बेहतर कर देता था और वह किसी भी परिस्थिति में इसे गा सकते थे। जब वह अच्छी लय में बल्लेबाजी कर रहे होते थे, तब उस दौर के लोकप्रिय फिल्मी गीत भी गुनगुनाते थे। वहीं, मानसिक एकाग्रता बनाए रखने और खुद को शांत रखने के लिए वह कई बार भजन भी दोहराते थे। सहवाग का मानना है कि गाने गाने से उनका ध्यान अनावश्यक दबाव से हट जाता था और वह गेंद को उसकी गुणवत्ता के आधार पर खेल पाते थे। इसी कारण वह तेज गेंदबाजों का सामना करते हुए भी पूरी सहजता के साथ बड़े शॉट खेलने में सफल रहते थे, जिससे उनकी बल्लेबाजी और भी प्रभावशाली हो जाती थी।


