1855 का संताल हूल जल, जंगल और जमीन की रक्षा का महासंग्राम था। आज 2026 परिस्थिति के अनुसार झारखंड को एक और वैचारिक हूल की जरूरत है, बेहद प्रासंगिक है।
आज राज्य के सामने अपनी अस्मिता, संस्कृति और संसाधनों को बचाने की नई चुनौतियाँ हैं। यह वैचारिक हूल हथियारों से नहीं, बल्कि शिक्षा, अधिकारों के प्रति जागरूकता और नीतिगत स्तर पर लड़ा जाना चाहिए। झारखंड के युवाओं को अपनी धरोहर सुरक्षित रखने और शोषण के खिलाफ एकजुट होने के लिए इस वैचारिक क्रांति की सख्त जरूरत है।
*आलोक सोरेन,विधायक
शिकारीपाड़ा*
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