देवघर जिले में 115 कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन,जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
देवघर:– झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर लंबित वेतन भुगतान की मांग को लेकर शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय देवघर के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। धरना में पूरे जिले भर से कुल 115 कर्मचारी शामिल हुए और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र के नेतृत्व में आयोजित इस धरना में नियमित,अनुबंध एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों ने चार-पांच माह से लंबित वेतन भुगतान की मांग को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि देवघर जिले के करीब 600 स्वास्थ्य कर्मियों को मार्च से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि आबंटन उपलब्ध रहने के बावजूद वेतन भुगतान नहीं होना गंभीर लापरवाही है। एनएचएम, बॉन्ड सेवा, आउटसोर्सिंग सहित कई मदों के कर्मचारियों को भुगतान नहीं हुआ है। धरना के दौरान सिविल सर्जन की अनुपस्थिति में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. के.के. सिंह पहुंचे और कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने बताया कि वेतन से संबंधित फाइल कोषागार भेज दी गई है, लेकिन डिजिटल हस्ताक्षर के अभाव में भुगतान लंबित है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर वेतन भुगतान नहीं हुआ तो उपायुक्त से मिलकर कोषागार का घेराव किया जाएगा। अंत में डॉ. के.के. सिंह को मांग पत्र सौंपा गया। धरना में जिला सचिव अरुण यादव, कोषाध्यक्ष सौरभ रिचर्ड, अरुण चौधरी, नीरज भगत, बृजेश झा, प्रवीण सिंह सहित कई कर्मचारी उपस्थित थे।
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कर्मचारी भुखमरी के कगार पर : मनोज मिश्र
देवघर:-झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि देवघर जिले में स्वास्थ्य विभाग के करीब 600 कर्मचारियों को मार्च माह से अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है,जिससे कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि स्थिति ऐसी हो गई है कि कई कर्मचारी भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। मिश्र ने कहा कि आबंटन उपलब्ध रहने के बावजूद वेतन भुगतान नहीं होना बेहद चिंताजनक और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि 2211 शीर्ष के कर्मचारी, एनएचएम, बॉन्ड सेवा और आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत सैकड़ों कर्मियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि महज डिजिटल हस्ताक्षर जैसी छोटी प्रक्रिया के अभाव में चार माह से वेतन भुगतान अटका हुआ है,जो कर्मचारियों के साथ अन्याय है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द वेतन भुगतान नहीं किया गया तो कर्मचारी आंदोलन को और तेज करेंगे तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाएगा।
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वेतन नहीं मिलने पर आंदोलन होगा और तेज : सौरभ
देवघर में सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर आउटसोर्सिंग व अनुबंध कर्मचारियों ने सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया। धरना का मुख्य कारण पिछले लगभग पांच महीनों से वेतन भुगतान नहीं होना बताया गया। जानकारी के अनुसार, आज पूरे राज्य में एक साथ इस मुद्दे को लेकर विभिन्न जिला कार्यालयों में कर्मचारी धरना दे रहे हैं। धरना में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि वे सभी एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं,ताकि समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित हो सके। जसीडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सौरभ रिचर्ड ने बताया कि जिले में कुछ प्रशासनिक कारणों से कर्मियों का वेतन लंबित है,जिससे कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि लंबित वेतन का जल्द भुगतान किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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परिवार का खर्च चलाना हुआ मुश्किल : ममता
देवघर:- सिविल सर्जन कार्यालय देवघर के बाहर कर्मचारियों ने संघ के बैनर तले एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर लंबित वेतन भुगतान की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले करीब चार महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
धरना में शामिल सीएचसी सारवां की ममता कुमारी ने बताया कि वेतन नहीं मिलने से परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की स्कूल फीस, कोचिंग शुल्क और बिजली बिल तक जमा नहीं हो पा रहा है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही वेतन भुगतान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा जरूरत पड़ने पर इसे उग्र रूप भी दिया जाएगा। कर्मचारियों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
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सरकार कर रही है सौतेला व्यवहार : आरती कुमारी
देवघर:- लंबे समय से वेतन भुगतान नहीं होने से नाराज संविदा कर्मियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। इसी के तहत सिविल सर्जन कार्यालय देवघर के बाहर कर्मियों का धरना प्रदर्शन जारी है, जहां वे अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
कर्मियों का कहना है कि उन्हें स्थायी कर्मचारियों की तरह नियमित वेतन नहीं मिलता, बल्कि नाप-तोल के आधार पर भुगतान किया जाता है, जिसमें किसी प्रकार की बढ़ोतरी भी नहीं होती। धरना में शामिल आरती कुमारी (सीएचसी सारवां) ने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है, क्योंकि पिछले चार से पांच महीनों से वेतन नहीं मिला है।
उन्होंने बताया कि वेतन नहीं मिलने के कारण घर का किराया,राशन और बच्चों की फीस तक समय पर जमा नहीं हो पा रही है। यहां तक कि बेटी की शादी के लिए भी दूसरों के सामने हाथ फैलाने की नौबत आ गई है। उन्होंने सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए जल्द भुगतान की मांग की है।
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दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल : नीलम
देवघर:-वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सिविल सर्जन कार्यालय देवघर के बाहर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा और जल्द समाधान की मांग की। धरना में शामिल लैब टेक्नीशियन नीलम सेट्टी ने कहा कि पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि पहले भी समय पर वेतन नहीं मिलता था, लेकिन इस बार देरी काफी ज्यादा हो गई है, जिससे दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। नीलम सेट्टी ने कहा कि वेतन नहीं मिलने से घर का खर्च, राशन और अन्य जरूरी खर्चों को संभालना कठिन हो गया है। उन्होंने प्रशासन से जल्द भुगतान सुनिश्चित करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
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तकनीकी कारणों का हवाला देकर भुगतान रोका जा रहा : अरुण
देवघर:-लंबित वेतन भुगतान को लेकर स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर आयोजित धरना प्रदर्शन में आउटसोर्सिंग, एनआरएचएम व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की और सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया। कर्मचारियों ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करते हुए सांकेतिक धरना आयोजित किया गया। उनका आरोप है कि केवल देवघर ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड में आउटसोर्सिंग व एनआरएचएम कर्मियों को पिछले 3 से 4 महीनों से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों ने कहा कि तकनीकी कारणों का हवाला देकर भुगतान रोका जा रहा है, जबकि वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वेतन नहीं मिलने से कई कर्मियों की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो गई है, यहां तक कि कुछ कर्मचारियों की मृत्यु की भी बात सामने आई है। जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, जसीडीह के प्रतिनिधि अरुण यादव ने सरकार से जल्द सभी लंबित वेतन भुगतान की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो पूरे राज्य में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।


