पेरिस । पश्चिमी एशिया में दशकों से चले आ रहे तनाव और सैन्य टकराव को समाप्त करते हुए, अमेरिका और ईरान ने एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस बहुप्रतीक्षित समझौते ने पिछले चार महीनों से वैश्विक समुदाय में व्याप्त अनिश्चितता को खत्म कर दिया है, और यह क्षेत्र में स्थिरता की नई उम्मीद जगा रहा है।यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे थे। एक दिलचस्प संयोग के तौर पर, प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को फ्रांस के वर्साय में इस समझौते ज्ञापन पर अपनी मुहर लगाई। उसी समय, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने भी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले ऐसी खबरें थीं कि अंतिम हस्ताक्षर 19 जून को जेनेवा में होंगे, लेकिन फ्रांस में ही यह ऐतिहासिक पल आ गया।
ट्रंप ने चिल्लाकर दी खुशखबरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान इस डील को मंजूरी दी। मैक्रों के बगल में ही उन्होंने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने भी हस्ताक्षर की पुष्टि की। खुद डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों को इस शुभ समाचार की जानकारी देते हुए वर्साय में जोर से चिल्लाकर कहा, इट्स साइन्ड! (इस पर हस्ताक्षर हो गए हैं!) रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच इस शांति समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक और औपचारिक दोनों स्तरों पर प्रक्रियाएं पूरी की गईं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ ने भी दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर किए।
होर्मुज पर मिली सबसे बड़ी खुशखबरी
इस समझौते की सबसे बड़ी खबर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह रणनीतिक समुद्री मार्ग कई महीनों से बंद था, जिससे वैश्विक तेल और गैस व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। समुद्र में भारत सहित कई देशों के 34 जहाज फंसे हुए थे, और इस मार्ग को लेकर लगातार बढ़ती चिंता ने वैश्विक तेल बाजार पर भारी दबाव डाल रखा था। समझौते के तहत, अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलने की बात कही गई है। ट्रंप के हस्ताक्षर करते ही, होर्मुज के खुलने की खुशखबरी ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को सामान्य करने और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने की उम्मीद जगा दी है। भारत समेत कई देशों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
ये हैं समझौते की खास बातें
अमेरिका-ईरान के बीच हुए इस समझौते में कुल 14 प्रमुख बिंदु शामिल हैं, जिनमें तत्काल और स्थायी युद्धविराम, तथा होर्मुज का खुलना सबसे अहम है। इसके अतिरिक्त, दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे, और अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। समझौते के तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने, समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही को सामान्य बनाने पर भी सहमति बनी है। ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत देने का प्रावधान भी रखा गया है, और ईरान की जमी हुई विदेशी संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने की योजना बनाई गई है। यह समझौता पश्चिमी एशिया में एक नए शांतिपूर्ण अध्याय का सूत्रपात कर सकता है।


