पलामू । पलामू जिले के हुसैनाबाद की पहचान मानी जाने वाली सोहया पहाड़ी को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कथित अवैध खनन और पर्यावरणीय दोहन के खिलाफ झारखंड के पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक कमलेश कुमार सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का दरवाजा खटखटाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया है कि सोहया पहाड़ी में वर्षों से चल रही खनन गतिविधियों ने क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। जिस पहाड़ी को कभी क्षेत्र की शान और हजारों किसानों के जीवन का आधार माना जाता था, आज वहां लगातार हो रहे पत्थर उत्खनन से पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है।
कमलेश सिंह ने सवाल उठाया है कि आखिर किसके संरक्षण में पहाड़ों का सीना छलनी किया जा रहा है? उन्होंने दावा किया कि कई खनन पट्टों की अवधि समाप्त होने के बाद भी कथित रूप से खनन कार्य जारी रहने की शिकायतें मिल रही हैं। इतना ही नहीं, बंद लीज क्षेत्रों में भी विस्फोटक सामग्री ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही की सूचनाएं सामने आ रही हैं, जो गंभीर जांच का विषय है। हाल ही में खनन क्षेत्र में बने गहरे जलभराव वाले गड्ढे में एक युवक की डूबकर हुई मौत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना खनन कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
पूर्व मंत्री ने एनजीटी से मांग की है कि सोहया पहाड़ी क्षेत्र की सभी स्टोन माइनिंग लीज, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनुमतियों की समीक्षा कराई जाए। साथ ही पर्यावरणीय क्षति का वैज्ञानिक आकलन कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा जांच पूरी होने तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अब देखना यह है कि सोहया पहाड़ी को बचाने की इस लड़ाई में एनजीटीऔर सरकार क्या रुख अपनाती है, या फिर खनन के शोर में पर्यावरण और ग्रामीणों की आवाज दबकर रह जाएगी।
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