संताल एक्सप्रेस ने मधुकर कुमार से की विशेष बातचीत
रामा कान्त मालवीय
देवघर। जिले के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष काम हुआ है। अधिकांश स्कूलों में भवन, बिजली, पेयजल, शौचालय और खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। बावजूद इसके शिक्षकों के 1640 पद रिक्त हैं, 11,221 बच्चे विद्यालय से बाहर हैं और कई विद्यालय अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। संताल एक्सप्रेस से विशेष बातचीत में जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने जिले की शिक्षा व्यवस्था की उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों को सामने रखा।
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प्रश्न : जिले में कुल कितने विद्यालय संचालित हैं?
उत्तर : जिले में कुल 1975 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1296 प्राथमिक विद्यालय, 549 मध्य एवं उत्क्रमित मध्य विद्यालय, 130 माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा 4 इंटर कॉलेज शामिल हैं।
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प्रश्न : विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं की स्थिति कैसी है?
उत्तर : सभी 1975 विद्यालयों में भवन उपलब्ध हैं। बेंच-डेस्क और आंतरिक वायरिंग की व्यवस्था भी की गई है। 1898 विद्यालयों में बिजली की सुविधा है, जबकि 77 विद्यालय अभी भी पूर्ण विद्युतीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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प्रश्न : पेयजल और शौचालय की व्यवस्था कितनी संतोषजनक है?
उत्तर : जिले के 1933 विद्यालयों में पेयजल सुविधा उपलब्ध है, लेकिन 42 विद्यालय अब भी इससे वंचित हैं। वहीं 1932 विद्यालयों में शौचालय हैं, जबकि 43 विद्यालयों में शौचालय नहीं हैं। चिंताजनक बात यह है कि 57 विद्यालयों के शौचालय अकार्यशील हैं।
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प्रश्न : खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए क्या व्यवस्था है?
उत्तर : सभी विद्यालयों में खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है। शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है।
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प्रश्न : शिक्षकों की उपलब्धता क्या सबसे बड़ी चुनौती है?
उत्तर : हां। प्राथमिक स्तर पर 958, माध्यमिक स्तर पर 644 और उच्च माध्यमिक स्तर पर 38 पद रिक्त हैं। कुल मिलाकर जिले में 1640 शिक्षकों के पद खाली हैं। इससे कई विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
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प्रश्न : छात्रों के नामांकन की स्थिति क्या है?
उत्तर : वर्ष 2025-26 में पीपी से बारहवीं तक कुल 2,92,329 छात्र नामांकित हैं। इनमें कक्षा 1 से 8 तक 2,18,974 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
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प्रश्न : शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चिंता क्या है?
उत्तर : जिले में 11,221 बच्चे विद्यालय से बाहर हैं या पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इसके अलावा केवल 370 विद्यालय ही आईसीटी योजना से जुड़े हैं और मात्र 37 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा उपलब्ध है। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत केवल 129 बच्चों का नामांकन भी कई सवाल खड़े करता है।
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जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने कहा कि विभाग का लक्ष्य प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है। इसके लिए विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार, नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। हालांकि शिक्षकों की कमी, अधूरी आधारभूत सुविधाएं और स्कूल से बाहर बच्चों की बड़ी संख्या अभी भी जिले की शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई है।


