दुमका: ग्रामीण इलाकों में रोजगार की कमी और मजबूरी का पलायन एक बार फिर एक प्रवासी मजदूर के लिए काल बन गया। ताजा दिल दहला देने वाला मामला दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड का है, जहां बेहतर जिंदगी के सपने लेकर गुजरात के अहमदाबाद कमाने गए नारगंज गांव निवासी दिनेश पंडित की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बुधवार को जब दिनेश का शव गांव पहुंचा, तो पूरे इलाके में मातम पसर गया। वहीं, उनके साथ गया एक अन्य युवक नरेश पंडित अब भी लापता है, जिससे पूरी घटना बेहद रहस्यमयी हो गई है।
परिजनों के मुताबिक, दिनेश 27 मई को गांव के ही कुछ युवकों के साथ घर से निकला था। शुक्रवार को आखिरी बार फोन पर बात होने के दौरान दिनेश ने अपनी पत्नी को बताया था कि साथ गए लोग एडवांस पैसों को लेकर विवाद कर रहे हैं, इसलिए वह घर लौट रहा है। इसके बाद दिनेश का शव बिहार के आरा जंक्शन के पास रेलवे ट्रैक पर सिर कटी हालत में मिला। हालांकि, साथ लौटे युवकों का दावा है कि दिनेश और नरेश चलती ट्रेन से कूद गए थे, लेकिन परिवार इस थ्योरी को खारिज करते हुए हत्या की साजिश की आशंका जता रहा है।
दिनेश अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसकी मौत से आहत ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जिसके कारण युवाओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता है। घटना के बाद मुखिया चांदनी देवी ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और सरकारी मदद का भरोसा दिया। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और श्रम विभाग के दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों ने अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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