नई दिल्ली । हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नई राजनीतिक लहर देखने को मिल रही है, जिसका नाम कॉकरोच जनता पार्टी है। महज़ कुछ ही दिनों पहले बॉस्टन में नौकरी की तलाश कर रहे 30 वर्षीय भारतीय छात्र अभिजीत दीपके ने अचानक इस पार्टी की शुरुआत की। देखते ही देखते सिर्फ 48 घंटों में इसके 5.5 लाख फॉलोअर्स हो गए और चौथे दिन तक इंस्टाग्राम पर यह आंकड़ा 60 लाख तक पहुंच गया। वेबसाइट पर भी दो लाख से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। इस अनोखे आंदोलन के पीछे काम कर रहे इसके संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक विशेष बातचीत में पार्टी के गठन और भविष्य की रणनीतियों पर खुलकर बात की। अभिजीत दीपके का आम आदमी पार्टी (आप) से पुराना जुड़ाव रहा है। वह 2020 से 2023 के बीच आप के कम्युनिकेशंस इन-चार्ज के रूप में काम कर चुके हैं। अरविंद केजरीवाल के स्वास्थ्य और शिक्षा मॉडल से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, लेकिन बाद में उच्च शिक्षा के लिए बॉस्टन यूनिवर्सिटी चले गए। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह आगामी 2029 के चुनावों में अरविंद केजरीवाल से हाथ मिलाएंगे, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी स्थापित राजनीतिक दल इस आंदोलन में शामिल नहीं होगा। आज की जेन-जी पीढ़ी का कोई भी युवा नहीं चाहता कि इसमें पुरानी व्यवस्था के दल आएं, हालांकि वे बाहर से अपना समर्थन दे सकते हैं। फिलहाल कॉकरोच मास्क पहने युवा जमीनी स्तर पर यमुना की सफाई जैसी मुहिमों में जुट गए हैं।
पार्टी के गठन की वजह
अभिजीत ने बताया कि भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) ने सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी (पैरासाइट्स) से की थी। संविधान के संरक्षक और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करने वाले शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति के मुंह से युवाओं के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल होना सबसे बड़ा ट्रिगर पॉइंट बना। अभिजीत का कहना है कि अगर यह टिप्पणी किसी राजनेता ने की होती, तो शायद इतना बड़ा बवंडर नहीं खड़ा होता, लेकिन देश के मुख्य न्यायाधीश से ऐसी उम्मीद नहीं थी। इसी का जवाब देने के लिए युवाओं ने इस नाम को एक आंदोलन में बदल दिया।


