नेचर सिटीज अध्ययन में खुलासा, आर्थिक विकास के साथ बढ़ रहा प्रदूषण
स्वच्छ शहरीकरण में चीन समेत कई देश आगे
नई दिल्ली । दुनिया के तेजी से विकसित हो रहे शहरों में प्रदूषण और आर्थिक समृद्धि के बीच गहरा संबंध सामने आया है। भारत के अनेक बड़े शहर आर्थिक विकास के साथ-साथ प्रदूषण की गंभीर चुनौती का भी सामना कर रहे हैं। अध्ययन में बताया गया है कि दुनिया के 390 ऐसे शहरों में, जिन्हें “सबसे अधिक प्रदूषित और समृद्ध” श्रेणी में रखा गया, उनमें 138 शहर भारत के हैं। यह कुल संख्या का लगभग 35.4 प्रतिशत है।
शोधकर्ताओं ने 2019 से 2024 के बीच दुनिया के 5,435 शहरों का अध्ययन किया। इसके लिए उपग्रह आधारित नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, डेटा और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुमानों का उपयोग किया गया। अध्ययन के मुताबिक, भारत में शहरी विकास अब भी बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधन आधारित परिवहन, उद्योग और बिजली उत्पादन पर निर्भर है, जिसके कारण आर्थिक प्रगति के साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में स्वच्छ विकास की दिशा में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर दिखाई दिए हैं, लेकिन अधिकांश भारतीय शहर अब भी प्रदूषण कम करने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाए हैं। इसके विपरीत चीन और कई अन्य देशों ने स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ शहरीकरण के जरिए प्रदूषण नियंत्रण में उल्लेखनीय प्रगति की है।
आर्थिक दृष्टि से भारत के प्रमुख शहरों में मुंबई सबसे आगे है। ‘हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025’ के अनुसार, मुंबई में 91 अरबपति रहते हैं, जिससे यह देश का सबसे अमीर शहर बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर करीब 26.33 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी के साथ दूसरे स्थान पर है। वहीं कोलकाता पूर्वी भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र माना जाता है।
आईटी और स्टार्टअप हब के रूप में पहचान बना चुका बेंगलुरु लगभग 9.86 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था के साथ देश की तकनीकी राजधानी बना हुआ है। वहीं चेन्नई, जिसे ‘ऑटो कैपिटल ऑफ इंडिया’ कहा जाता है, करीब 7.05 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी के साथ ऑटोमोबाइल, आईटी और हेल्थकेयर क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को आर्थिक विकास के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन और हरित तकनीकों को तेजी से अपनाने की जरूरत है, ताकि आने वाले वर्षों में शहरी प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।


