नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जंग के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण घरेलू तेल कंपनियों को हर दिन लगभग 1,380 करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस अंडर-रिकवरी (घाटे) को पूरी तरह से पाटने और कंपनियों को संकट से उबारने के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 25 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी करने की आवश्यकता जताई जा रही है।
पिछले हफ्ते सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतें 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाने के बाद भी, भारतीय फ्यूल रिटेलर्स को अभी भी नुकसान हो रहा है। जानकारों के अनुसार फ्यूल रिटेलर्स की लागत पूरी नहीं हो पा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, उन्हें मार्केटिंग मार्जिन पर भी बराबरी पर आने के लिए कीमतों में 25 रुपए प्रति लीटर की और बढ़ोतरी की जरूरत है। इन विश्लेषकों का अनुमान है कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को रोजाना 1,380 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।
डॉलर के मुकाबले 96.35 पर पहुंचा रूपया
अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपया पस्त होकर सोमवार को अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर लुढक़ गया है। डॉलर की लगातार बढ़ती ताकत के बीच पहली बार एक डॉलर की कीमत 96.23 रुपये पर पहुंच गई है। शुक्रवार को जब बाजार बंद हुआ था, तब यह आंकड़ा 95.97 पर था, लेकिन सप्ताहांत के बाद बाजार खुलते ही रुपये में भारी बिकवाली दर्ज की गई। इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में लगातार गहराता भू-राजनीतिक तनाव है। इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल 111 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर गया है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख समुद्री रास्ता है, वहां किसी भी तरह की रुकावट की आशंका ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढऩे से देश का आयात बिल तेजी से बढ़ता है। इसी चिंता के कारण निवेशकों के बीच घबराहट फैली है।
विदेशी-निवेशकों ने मई में निकाले 27,048 करोड़
विदेशी निवेशकों ने इस महीने (मई) भारतीय शेयर बाजार से अब तक 27,048 करोड़ की नकदी निकाल ली है। ग्लोबल इकोनॉमिक एनवायरमेंट और जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक लगातार भारतीय इक्विटी बाजार में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इस ताजा बिकवाली के साथ साल 2026 में अब तक कुल आउटफ्लो 2.2 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है, जो साल 2025 की कुल बिकवाली से भी ज्यादा है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के डेटा के मुताबिक, साल 2026 में फरवरी महीने को छोडक़र विदेशी निवेशक हर महीने नेट सेलर्स (बिकवाल) रहे हैं। जनवरी में निवेशकों ने 35,962 करोड़ बाजार से निकाले थे। इसके बाद फरवरी में ट्रेंड बदला और उन्होंने 22,615 करोड़ का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों में किसी एक महीने का सबसे बड़ा इनफ्लो था।


