दुमका : झारखंड सरकार की ओर से उच्च शिक्षा व्यवस्था में प्रस्तावित ‘पुनर्गठन’ और ‘क्लस्टरिंग सिस्टम’ के विरोध में सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का आक्रोश अब तेज होने लगा है। शुक्रवार को एसकेएमयू के छात्र प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के सीसीडीसी डॉ. अब्दुस सत्तार के माध्यम से राज्यपाल सह कुलाधिपति के नाम ज्ञापन सौंपकर इस नई व्यवस्था को राज्य की शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान के खिलाफ “सुनियोजित षड्यंत्र” बताया।
छात्रों ने कहा कि सरकार की नई नीति के तहत विश्वविद्यालय और अंगीभूत महाविद्यालयों में शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों का पुनर्गठन किया जाएगा। साथ ही ‘क्लस्टरिंग सिस्टम’ लागू कर किसी कॉलेज को केवल विज्ञान, किसी को कला और किसी को वाणिज्य संकाय तक सीमित करने की योजना बनाई जा रही है। विद्यार्थियों का आरोप है कि यह व्यवस्था नई शिक्षा नीति की मूल भावना के विपरीत है, क्योंकि नई शिक्षा नीति बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देती है, जबकि यह प्रस्ताव छात्रों से विषय चयन की स्वतंत्रता छीनने वाला है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि संताल परगना जैसे ग्रामीण और पिछड़े इलाके में यह व्यवस्था हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल असर डालेगी। विशेष रूप से ग्रामीण छात्राओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। अधिकांश छात्राएं सुरक्षा और संसाधनों की कमी के कारण अपने नजदीकी कॉलेजों में ही पढ़ाई कर पाती हैं। यदि विषयों के आधार पर कॉलेजों का विभाजन किया गया, तो उन्हें दूर-दराज के संस्थानों में जाना पड़ेगा, जिससे पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत आ सकती है। वहीं गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर परिवहन और आवास का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा।
छात्र नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पुनर्गठन के नाम पर संताली, हो, नागपुरी जैसी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विभागों को सीमित करने की तैयारी की जा रही है। इससे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और भाषाई पहचान को गंभीर क्षति पहुंचेगी। साथ ही विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पहले से खाली पड़े शिक्षकों एवं कर्मचारियों के पदों को सरेंडर करने की योजना शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर करेगी।
ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने राज्यपाल सह कुलाधिपति से मांग की कि सभी महाविद्यालयों में पूर्व की तरह कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों को यथावत रखा जाए। कम नामांकन वाले विषयों को बंद करने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित किया जाए तथा शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने के लिए जल्द नियुक्तियां निकाली जाएं। इसके अलावा किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग भी की गई।
इस दौरान आनंद हेंब्रम, दिलीप टुडू, रोशन राज टुडू, देव हेंब्रम, आरती टुडू, सुमित्रा मुर्मू, लाल सोरेन, राजेन समेत सैकड़ों छात्र मौजूद रहे।
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