नई दिल्ली । निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका खत्म करने के केंद्र सरकार के कानून पर उच्चतम न्यायालय ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक कैबिनेट मंत्री प्रधानमंत्री के खिलाफ जा ही नहीं सकता है। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि ऐसे में सभी नियुक्तियों पर फैसला जाहिर तौर पर तिहाई के बहुमत से ही होगा। सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जब देश के मुख्य न्यायाधीश सीबीआई निदेशक की चयन प्रक्रिया में शामिल होते हैं तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दूसरे निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए भी स्वतंत्र प्रक्रिया क्यों नहीं हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि यह भी बहुत महत्वपूर्ण है और निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। इसके पहले 7 मई को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर चिंता जताई थी कि देश में सरकारों ने निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कानून नहीं बनाए।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण से पूछा कि संसद ने बरनवाल फैसले के पहले कोई कानून क्यों नहीं बनाया। दरअसल, 2023 में अनूप बरनवाल के फैसले में ही उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति वाले पैनल में मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने का आदेश दिया था। सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने प्रशांत भूषण से पूछा कि बरनवाल फैसले के पहले संसद ने कानून क्यों नहीं बनाया तो प्रशांत भूषण ने कहा कि हर सरकार ने कानून नहीं होने का लाभ उठाया। इसी वजह से सरकारें इसका दुरुपयोग करती रही हैं। जब लोग विपक्ष में होते हैं तो कहते हैं कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष होना चाहिए लेकिन जब सत्ता में होते हैं तो इस बारे में सोचना बंद कर देते हैं। इस मामले में एडीआर के अलावा एक याचिका जया ठाकुर ने दायर की है। याचिका में चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश को भी रखने की मांग की गई है।
इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले कुछ वकीलों ने भी याचिका दायर कर रखी है। याचिका में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कानून को चुनौती देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियों में देश के मुख्य न्यायाधीश को भी पैनल में शामिल करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव में पारदर्शिता के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना जरुरी है। उच्चतम न्यायालय ने 2 मार्च 2023 में अपने एक फैसले में कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा इस फैसले पर नया कानून बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश की बजाय सरकार का एक कैबिनेट मंत्री शामिल कर दिया।


