रांची । झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आलमगीर आलम को टेंडर कमीशन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की पीठ ने उनकी जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है, जिससे करीब दो साल तक जेल में रहने के बाद अब उनके बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 11 जुलाई 2025 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 मई 2024 को लंबी पूछताछ के बाद आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि ग्रामीण विकास विभाग में इंजीनियरों, अधिकारियों और मंत्रियों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जो टेंडर आवंटन के बदले निश्चित कमीशन वसूलता था।
ईडी ने अदालत के समक्ष जनवरी 2024 में पास किए गए 92 करोड़ रुपये के 25 टेंडरों से संबंधित दस्तावेज पेश किए थे। एजेंसी का दावा है कि इन टेंडरों के बदले आलमगीर आलम को कथित तौर पर 1.23 करोड़ रुपये का कमीशन प्राप्त हुआ था। इस मामले की जांच की आंच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पूर्व सचिव मनीष रंजन तक भी पहुंची थी, जिनसे ईडी ने विस्तार से पूछताछ की थी। इस पूरे घोटाले का खुलासा मई 2024 में हुआ था, जब ईडी ने आलमगीर आलम के तत्कालीन निजी सचिव संजीव लाल और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान लगभग 32.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद हुई थी। छापेमारी के बाद संजीव लाल और उनके घरेलू सहायक जहांगीर आलम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। संजीव लाल से पूछताछ और बरामद दस्तावेजों के आधार पर ही ईडी ने पूर्व मंत्री पर शिकंजा कसा था। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। यह फैसला आलमगीर आलम के समर्थकों और कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।


