नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते उत्पन्न एलपीजी संकट अब छोटे गैस सिलेंडरों को भी अपनी चपेट में ले चुका है। 5 किलोग्राम वाले छोटू सिलेंडर की कीमतों में अचानक 261 रुपये की भारी बढ़ोतरी ने शहरी छात्रों, प्रवासी श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। सरकार ने इन तबकों के लिए इसे सुलभ बनाया था, लेकिन अब यह उन्हीं के लिए महंगा साबित हो रहा है। लखनऊ में अब 5 किलोग्राम का यह सिलेंडर 885.50 रुपये में मिल रहा है, जो पहले 624.50 रुपये का था। इस एकमुश्त बढ़ोतरी ने बड़े 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (913 रुपये) और छोटू सिलेंडर के बीच कीमत का अंतर महज 31 रुपये का कर दिया है। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में व्यावसायिक गैस सिलेंडर के दाम भी 1,000 रुपये बढ़कर 3,194 रुपये पहुंच गए थे, जिससे होटल और छोटे व्यवसायों पर भी गंभीर बोझ पड़ा है। इस फैसले का सबसे गंभीर असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो शहरों में रहकर पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
हॉस्टलों में या किराए के कमरों में रहने वाले ये छात्र अक्सर छोटे सिलेंडरों का ही इस्तेमाल करते हैं। साथ ही रियल एस्टेट क्षेत्र में काम करने वाले निर्माण मजदूरों, अन्य प्रवासी श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भी अब सस्ते ईंधन का विकल्प महंगा हो गया है। सरकार ने इन तबकों को सुविधा देने के लिए ही छोटू सिलेंडर को सुलभ बनाया था, लेकिन अब इसका महंगा होना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और सीमित बजट को बुरी तरह प्रभावित करेगा।
आंकड़ों के अनुसार 5 किलोग्राम छोटू सिलेंडर का प्रति किलोग्राम भाव अब 176.40 रुपये हो गया है, जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर का प्रति किलोग्राम भाव लगभग 64.29 रुपये बैठता है। इस तरह छोटे सिलेंडर का उपयोग करने वालों को प्रति किलोग्राम तीन गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी संकेत दिए हैं कि वैश्विक बाजार में 30 फीसदी तक दाम बढ़ने पर कोई भी देश अछूता नहीं रह सकता। सूत्रों का कहना है कि एलपीजी के बाद अब पेट्रोल-डीजल के दाम भी 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई का एक और बड़ा झटका लगने की आशंका है।


