नई दिल्ली । हाल ही में मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के पहाड़ी और चट्टानी इलाकों में इंडियन ईगल आउल नजर आया है। यह खास तरह का उल्लू इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भगवानपुरा क्षेत्र के जंगलों और चट्टानों के आसपास यह उल्लू दिखाई देने लगा है। आमतौर पर रात में सक्रिय रहने वाला यह पक्षी इन दिनों दिन के उजाले में भी नजर आ रहा है। कई लोगों ने इसे अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया, जिसके बाद इसके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे और यह चर्चा का विषय बन गया। लोगों को सबसे ज्यादा हैरानी इस उल्लू के सिर पर दिखाई देने वाली सींग जैसी आकृति को देखकर हो रही है। दूर से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे इसके सिर पर छोटी-छोटी सींग निकली हुई हों। इसी कारण स्थानीय लोग इसे ‘सींग वाला उल्लू’ कहने लगे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई रहस्यमयी या नई प्रजाति नहीं है, बल्कि यह इंडियन ईगल आउल है, जिसका वैज्ञानिक नाम बूबो बेंगलेंसिस है। जानकारों के अनुसार भारत में उल्लुओं की लगभग 25 प्रजातियां पाई जाती हैं।
खरगोन में दिखाई देने वाला यह उल्लू इंडियन ईगल आउल की ही प्रजाति है, जिसे बंगाल ईगल आउल, भारतीय चट्टानी उल्लू या चील उल्लू भी कहा जाता है। यह पक्षी मुख्य रूप से पहाड़ी, चट्टानी और झाड़ीदार जंगलों में रहना पसंद करता है। गर्म और शुष्क इलाकों के जंगलों तथा चट्टानों के आसपास इसका बसेरा अधिक देखा जाता है। यह आमतौर पर इंसानों से दूरी बनाकर रहता है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में कम ही दिखाई देता है। इंडियन ईगल आउल एक शिकारी और रात्रिचर पक्षी है, जो दिन के समय अपेक्षाकृत कम सक्रिय रहता है और रात में शिकार के लिए निकलता है। इसकी आंखें अंधेरे में भी बेहद तेज होती हैं, जिससे यह रात में आसानी से अपने शिकार को देख सकता है। दिन में यह प्रायः पेड़ों, चट्टानों या झाड़ियों में छिपकर आराम करता है। भोजन के रूप में यह छिपकली, मेंढक, चूहे, छोटे सांप और अन्य छोटे जीवों का शिकार करता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इसके सिर पर दिखाई देने वाली सींग जैसी संरचना वास्तव में सींग या कान नहीं होती, बल्कि पंखों का एक गुच्छा होता है जो माथे के ऊपर खड़ा रहता है। दूर से देखने पर यह सींग जैसा प्रतीत होता है, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रिपोर्ट के अनुसार इंडियन ईगल आउल की संख्या फिलहाल स्थिर मानी जाती है और यह विलुप्त होने की कगार पर नहीं है। भारत में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत इसे संरक्षित प्रजाति में रखा गया है। इस पक्षी को नुकसान पहुंचाना, पकड़ना या शिकार करना कानूनन अपराध है, जिसके लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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