नई दिल्ली । स्कूटर में एयरबैग टेक्नोलॉजी को शामिल करने की पहल सामने आई है, जो दुर्घटना के समय राइडर की सुरक्षा को बेहतर बना सकती है। इस नई तकनीक को विकसित करने में ऑटोलीव और यामाहा मोटर ने मिलकर काम किया है। यह एयरबैग सिस्टम खास तौर पर यामाहा ट्रीसिटी 300 स्कूटर के लिए तैयार किया गया है। इसे स्कूटर के फ्रंट एप्रन के अंदर लगाया गया है, ताकि सामने से टक्कर होने की स्थिति में यह तुरंत खुलकर राइडर के सामने एक कुशन की तरह काम कर सके।
कंपनी के अनुसार यह सिस्टम फ्रंटल एक्सीडेंट के दौरान सिर और शरीर को गंभीर चोट से बचाने में मदद कर सकता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि स्कूटर के संतुलन, स्टोरेज स्पेस या राइडिंग अनुभव पर कोई असर न पड़े। लॉन्च से पहले इस तकनीक को कई एडवांस सिमुलेशन और क्रैश टेस्ट से भी गुजारा गया है। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक टू-व्हीलर सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। अब तक टू-व्हीलर राइडर्स के लिए एयरबैग तकनीक मुख्य रूप से जैकेट या वेस्ट के रूप में उपलब्ध रही है। हालांकि कुछ चुनिंदा मॉडलों में इसे सीधे वाहन में भी शामिल किया गया है, जैसे होंडा गोल्ड विंग टूर।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्कूटर और मोटरसाइकिलों में यह तकनीक व्यापक रूप से अपनाई जाती है, तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली गंभीर चोटों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बता दें कि दोपहिया वाहनों में सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है, क्योंकि इनमें कारों की तुलना में सुरक्षा फीचर्स कम होते हैं। हालांकि अब तकनीक के विकास के साथ कंपनियां राइडर्स की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए प्रयोग कर रही हैं।
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