रांची। असम में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता तेज हो गई है। इसी बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा भी असम में अपना जनाधार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। इस कड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 10 मार्च को असम दौरे पर जाएंगे, जहां वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का यह दौरा मुख्य रूप से असम के चाय बागानों में रहने वाले करीब 70 लाख आदिवासियों के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से उठती रही है और इसी मुद्दे को लेकर झामुमो वहां अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, असम में विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने की संभावना है। इसे देखते हुए राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। झामुमो भी इस चुनाव में आदिवासी समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति बना रही है। गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम गए थे। उस दौरान उन्होंने चाय बागानों में रहने वाले आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को उठाने और उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने का भरोसा दिया था। अब एक बार फिर उनके असम दौरे को लेकर वहां की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि झामुमो आदिवासी मुद्दों के सहारे असम में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।
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