चंदन मिश्र
झारखंड में नगर निकाय के चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रही है। भाजपा की इस हार का कारण भाजपा के ही नेता रहे हैं। पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा नगर निकाय के चुनाव में आधी से भी कम पर रह गई। इस बार नौ में से मात्र तीन नगर निगम में ही भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की जीत हो पायी। धनबाद, हजारीबाग और देवघर में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा। सच कहें तो भाजपा के बड़े नेताओं, सांसदों, विधायकों को इस बात का दंभ रहा कि वे जो चाहेंगे, वही होगा। अव्वल तो जमीनी हकीकत को समझने में प्रदेश के नेता पूरी तरह फेल हो गए। बाकी बची कसर कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद पूरी हो गई। इसलिए जब भाजपा प्रदेश के नेता जीत का जश्न मना रहे थे तब आमंत्रण के बावजूद धनबाद के निर्वाचित मेयर उम्मीदवार संजीव सिंह, हजारीबाग के अरविन्द कुमार राणा ने इसमें शामिल होने से साफ मना कर दिया। दरअसल चुनाव के पहले दर्जन भर से ज्यादा बागियों को प्रदेश भाजपा ने पहले चेतावनी दी और जब चेतावनी काम न आयी तो कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। और अब परिणाम आने के बाद भाजपा को उसके बागियों ने ही प्रदेश के नेताओं आईना दिखा दिया। आखिर भाजपा नेताओं ने उन्हें क्या समझ लिया है। जब चाहा उन्हें नोटिस थमा दिया, जीत गये तो अपना मानने को विवश कर दिया। आखिर ऐसे जनप्रतिनिधियों का आत्म सम्मान है या नहीं ? भाजपा नेताओं को उनकी भूल का अहसास कराकर निर्वाचित मेयरों और अन्य नेताओं ने झारखंड भाजपा को आईना दिखा दिया।
पिछले चुनाव में भाजपा ने मेयर की पांचों सीटों पर कब्जा जमाया था, इस बार भाजपा समर्थित तीन ही सीटों पर सफलता मिली है। रांची, मेदिनीनगर और आदित्यपुर के मेयर भाजपा समर्थित चुने गए, जबकि झामुमो समर्थित देवघर के रवि राउत और गिरिडीह की प्रमिला मेहरा जीतकर आई हैं। हजारीबाग, धनबाद और चास से निर्दलीय प्रत्याशी जीते। रांची, मेदिनीनगर, हजारीबाग, आदित्यपुर, गिरिडीह और धनबाद पिछली बार भाजपा के खाते में गया था। मानगो नया नगर निगम बनाया गया है। देवघर और चास से पिछली बार निर्दलीय उम्मीदवार जीत कर आए थे। इस बार भी चास निर्दलीय के खाते में गया। झामुमो ने पहली बार गिरिडीह और देवघर नगर निगम पर कब्जा जमाने में सफलता पाई है।
भाजपा कहने को तो पूरे प्रदेश में पूरी शिद्दत के साथ चुनाव लड़ी, लेकिन दल के जिलों के नेताओं के अंतर्कलह से निपट नहीं पाई। इसका परिणाम हुआ कि नगर निकाय चुनाव में उसकी सियासी जमीन खिसक गई। इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव नतीजों में भुगतना पड़ा। नौ नगर निगम में धनबाद, मानगो, हजारीबाग, गिरिडीह और देवघर नगर निगम में भाजपा के बागी और असंतुष्ट नेताओं को भाजपा नेतृत्व संभाल पाने में पूरी तरह विफल रहा। धनबाद में उम्मीदवार बदला गया, उसका नतीजा साफ दिखा। संजीव सिंह भाजपा के पूर्व विधायक रहे हैं। बागी बनकर चुनाव मैदान में उतरे। वहीं पिछले मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल को भाजपा ने समर्थन नहीं देकर संजीव अग्रवाल को अपना समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिया। उसका नतीजा रहा, भाजपा समर्थित उम्मीदवार तीसरे नंबर पर चले गए। हजारीबाग में भाजपा ने सुदेश चंद्रवंशी को समर्थन तो दिया, लेकिन स्थानीय सांसद और विधायक का इन्हें समर्थन नहीं मिला, नतीजा भाजपा पिछड़ गई। देवघर और मानगो नगर निगम में भाजपा के वोटों का बिखराव और दलीय अंतर्कलह उसके उम्मीदवारों को ले डूबा। भाजपा ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। केंद्र से भाजपा के महासचिव अरुण सिंह नगर निकाय चुनाव की रणनीति बनाने के लिए खासकर तैनात किए गए थे। लेकिन उनकी उपस्थिति का कोई खास असर नहीं दिखाई दिया। उन्होंने बागियों और असंतुष्ट नेताओं को मनाने में पूरी तरह विफल रहे। चुनाव जीत के जश्न में भी राष्ट्रीय महासचिव अरूण कुमार सिंह विशेष तौर पर उपस्थित हुए, लेकिन बागियों ने उनकी भी एक न सुनी। आनेवाले दिनों के लिए भाजपा के लिए यह बड़ी चेतावनी है।
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