सरकार ने अवैध हस्तांतरण पर कार्रवाई का दिया भरोसा
रांची: झारखंड विधानसभा में संताल परगना क्षेत्र की जमीनों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर अहम चर्चा हुई। जरमुंडी देवेंद्र कुंवर ने अल्पसूचित प्रश्न संख्या-37 के तहत संताल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 की धारा-20 के प्रावधानों और उसके उल्लंघन को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से मंत्री ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि संताल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 की धारा-20 में वर्णित प्रावधानों के विपरीत यदि किसी प्रकार का अवैध भूमि हस्तांतरण होता है, तो अधिनियम की धारा-42 के तहत कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है। इसके अंतर्गत अवैध दखलकार को भूमि से बेदखल कर मूल रैयत को भूमि वापस दिलाई जाती है।
गैर-आदिवासियों को जमीन हस्तांतरण पर स्थिति पर विधायक ने यह भी पूछा कि क्या संताल परगना क्षेत्र में ट्राइब, प्रिमिटिव ट्राइब और एबोरिजिनल्स की जमीन गैर-आदिवासियों को बिना उपायुक्त की पूर्व अनुमति के हस्तांतरित नहीं की जा सकती है? इस पर सरकार ने कहा कि इस संबंध में स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है और संबंधित प्रावधानों का अनुपालन सख्ती से किया जा रहा है। विधायक ने कहा कि लगातार बढ़ते उल्लंघन के कारण संताल परगना की आदिवासी जमीनों पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा हुआ है और यह अभी भी जारी है? सरकार ने इस पर भी पहले दिए गए उत्तर का हवाला देते हुए कहा कि कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
विधायक ने पूछा कि यदि धारा-20 का उल्लंघन पाया जाता है तो क्या सरकार उच्च स्तरीय जांच कर अवैध कब्जों और बदली हुई जनसांख्यिकी की जांच कराएगी? सरकार ने कहा कि इस विषय में भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है और अधिनियम के अनुरूप कार्रवाई की प्रक्रिया लागू है।
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विधायक देवेंद्र कुंवर ने उठाया सोनारायठाढ़ी स्वास्थ्य केंद्र का मुद्दा, सरकार ने दिया जवाब
रांची: जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र के सोनारायठाढ़ी प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर विधानसभा में सवाल उठाए गए। विधायक देवेंद्र कुंवर ने सदन में सवाल पूछा कि सोनारायठाढ़ी प्रखंड से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर करोड़ों रुपये की लागत से बना विशाल स्वास्थ्य केंद्र बेकार पड़ा हुआ है। स्वास्थ्य केंद्र आधारभूत संरचना और संचालन के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच रहा है और विभाग उदासीन बना हुआ है।
सरकार ने दोनों आरोपों को अस्वीकारात्मक बताया। कहा गया कि सोनारायठाढ़ी प्रखंड से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन वित्तीय वर्ष 2016-17 में 2,36,12,700 रुपये की लागत से निर्मित किया गया था और यह वर्तमान में संचालित है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र में 2 चिकित्सक एवं 17 कर्मी कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भवन की स्थिति को “अच्छी” बताते हुए कहा गया कि रख-रखाव और बेहतर संचालन के लिए मुख्यमंत्री अस्पताल रख-रखाव योजना के तहत 5 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है।


