– 150 करोड़ से भी अधिक राशि जुड़ी है इस घोटाले से
धनबाद । धनबाद रिंग रोड जमीन मुआवजा घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। इसमें 150 करोड़ से भी अधिक राशि का घोटाला किया गया था। घोटाले के किंग पिन सह तात्कालिक भू अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक (अब सेवा से बर्खास्त) सहित 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। एसीबी की 10 टीम ने गुरुवार की रात धनबाद सहित राज्य के अन्य जिलों में छापेमारी की और आरोपियों को गिरफ्तार किया। रात भर चली इस छापेमारी में एसीबी की 10 टीमें लगी थीं। धनबाद के साथ – साथ रांची, दुमका, गिरिडीह और देवघर में एसीबी ने छापेमारी की। छापेमारी में स्थानीय पुलिस की टीम भी साथ में थी।
एसीबी की इस कार्रवाई में तत्कालीन बर्खास्त भू- अर्जन पदाधिकारी (डीएलओ) उदयकांत पाठक, धनबाद के तत्कालीन अंचल अधिकारी विशाल कुमार, तत्कालीन अंचल निरीक्षक नीलम सिन्हा, क्लर्क कुमारी रत्नाकर समेत अन्य अधिकारी और कर्मी की गिरफ्तारी की गई है।
धनबाद को ट्रैफिक जाम से मुक्ति के लिए शहर के बाहर रिंग रोड निर्माण की योजना बनी थी। इसमें धनबाद अंचल के धनबाद, मनईटांड़ और धोकरा मौजा की तीन सौ एकड़ जमीन का अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 237 करोड़ रुपए जमीन अधिग्रहण के लिए जारी किए गए थे। जमीन के बदले रैयतों को मुआवजा राशि देनी थी। इसी मामले में अधिकारी और जमीन माफिया की मिलीभगत से घोटाला किया गया। इसमें जमीन मालिक (रैयत)की जगह अन्य लोगों को राशि का भुगतान कर दिया गया। कई मामलों में तो फर्जी डीड (जमीन रजिस्ट्री के दस्तावेज) का भी उपयोग किया गया। फर्जी डीड के आधार पर जमीन की दाखिल- खारिज भी कर दी गई। इसी को आधार बनाकर जमीन माफिया ने फर्जी तरीके से भुगतान ले लिया। आदिवासियों की जमीन के बदले दूसरे लोगों ने मुआवजा की राशि ले ली। मामले की जानकारी होने पर जांच शुरू हुई। 2013 में पहली बार शिकायत की गई। 2014 में जांच शुरू हुई। 2016 में तत्कालीन डीसी कृपानंद झा के निर्देश पर धनबाद थाना में मामला दर्ज करवाया गया। 34 लोगों को आरोपी बनाया गया था। व्यापक जांच शुरू हुई। बाद में मामला एसीबी के हवाले किया गया। भू – अर्जन पदाधिकारी को निलंबित किया गया। बाद में उनकी गिरफ्तारी भी हुई। सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया। लंबी कार्रवाई के बाद गुरुवार को व्यापक गिरफ्तारी हुई।


