राज्य और राजनीति
चंदन मिश्र
झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र गुरुवार को निपट गया। पांच दिसंबर से शुरू हुए पांच दिनों के इस सत्र में काम से ज्यादा हल्ला-हंगामा हुआ। विपक्ष का हल्ला-हंगामा और विरोध तो लोगों के समझ में आता है, लेकिन जब सत्ता पक्ष के लोग ही हल्ला-हंगामा करने लगें तो इसे क्या कहेंगे ? पांच दिनों के सत्र में पहला दिन आरंभिक औपचारिकता में ही बीत गया। प्रश्नोत्तर के लिए चार दिन ही शेष थे। इन चार दिनों में भी बमुश्किल दो दिन ही ढंग से सवाल-जवाब सामने आए। विपक्ष के सदस्यों ने यूं तो कई मुद्दों पर सदन के अंदर सरकार को घेरने की कोशिश की। सरकार के कुछ मंत्रियों को जवाब देते नहीं बन रहा था। लेकिन सदन में उस समय बड़ी विचित्र स्थिति बन गई जब सत्ता पक्ष के दो सदस्य आपस में ही भिड़ गये। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रजीप यादव के सवाल पर स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और खाद्य आपूर्ति विभाग के मंत्री इरफान अंसारी जवाब दे रहे थे। मंत्री इरफान अंसारी के जवाब से कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव खुश नहीं थे। प्रदीप यादव बार-बार सवाल दुहरा रहे थे। लेकिन मंत्री इरफान अंसारी सवाल का सीधा जवाब देने की बजाय इधर- उधर घुमाते रहे। दोनों के बीच तेजी से नोक-झोंक होने लगी। स्पीकर रबींद्र नाथ महतो को कई बार मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। वह मंत्री को तो कुछ नहीं कहा, लेकिन कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव पर झल्लाते हुए कहा कि प्रदीप जी, क्या आपके एक ही सवाल पर ही सदन की कार्यवाही समाप्त हो जाये। सदन में सत्ता पक्ष के बीच होनेवाले इस नोक-झोंक का विपक्षी दलों ने जमकर आनंद लिया। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया कि सरकार के मंत्री बगैर तैयारी के ही सदन में पहुंचते हैं। सदस्यों के सवालों का सटीक जवाब देने की बजाय बातों को घुमाते-फिराते रहते हैं। वैसे ही झामुमो के वरिष्ठ विधायक हेमलाल मुर्मू और सिल्ली के विधायक अमित महतो, अपनी सरकार के मंत्रियों से बहस करते दिखे। कई विधायकों ने तो आसन से शिकायत की है कि मंत्री उनके सवालों का सही-सही जवाब नहीं देते हैं।
शीत सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने थैलिसीमिया और बोन मैरो ट्रांसप्लांट मामले को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से विधायक प्रदीप यादव ने राज्य में थैलीसीमिया मरीजों की संख्या, बोन मैरो ट्रांसप्लांट सुविधा और सरकारी सहायता को लेकर सवाल पूछे। प्रदीप यादव ने पूछा था कि थैलेसीमिया पीड़ितों को राज्य में मुफ्त रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं और क्या सरकार अन्य राज्यों की तरह इलाज के लिए 15-20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने पर विचार करेगी। प्रदीप यादव एक के बाद एक सवाल दागे। उनके सवाल से मंत्री पर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी झल्लाये। इस पर प्रदीप यादव ने कहा कि उनके सवालों का जवाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी जवाब आरोप लगाया कि ब्लड ट्रांसप्लांट के नाम पर एक अस्पताल ने मरीजों से पैसे वसूले हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि विधायक सदन को गुमराह कर रहे हैं। इनके पास कोई स्पष्ट प्रमाण है तो उसे दें। मंत्री के जवाब कांग्रेस के विधायक संतुष्ट नहीं हुए। मंत्री और कांग्रेस विधायक की नोक-झोंक पर स्पीकर रबींद्र महतो बिफर पड़े। उन्होंने कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव पर बिफरते हुए कहा कि प्रदीप जी, आप जो चाहेंगे वही नहीं होगा। आपके प्रश्न पर ही सदन नहीं चलेगा। कांग्रेस की मंत्री दीपिका पांडेय ने भी अपने सहयोगी मंत्री का समर्थन करते हुए कहा कि विधायक अपने हिसाब से जवाब चाहते हैं, यह सही नहीं है।
विपक्ष के सवालों को लेकर सत्ता पक्ष के मंत्री कई बार पूर्वाग्रह से ग्रसित नजर आते हैं। हालांकि स्पीकर रबींद्र नाथ महतो का सत्ता पक्ष के सदस्यों, खासकर मंत्रियों पर विशेष संरक्षण होता है। लेकिन सरकार के मंत्री भी हद कर देते हैं। वे अपने हिसाब से अधिकारियों के बनाये जवाब ही सदन में रखते हैं। विधायकों को उनके सवालों का जवाब देने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं। सदन की कार्यवाही इस हंगामे के कारण बाधित होती है। जनता के सवाल कई बार हंगामे में गुम हो जाता है। माननीयों को इस विकार से उबरना होगा। जनता की सबसे बड़ी पंचायत विधानसभा में जनता के सवालों का जवाब मिलना ही चाहिए। मंत्रियों को सदन और जनता के प्रति जवाबदेह बनाना पड़ेगा।
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