पटना । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले तेजस्वी यादव आईआरसीटीसी मामले में फंस गए हैं। दरअसल राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी समेत केस के अभियुक्तों पर आरोप तय कर दिए हैं। हालांकि लालू यादव और राबड़ी देवी ने आरोपों से इनकार किया और ट्रायल फेस करने की बात भी कही है, परंतु यह फैसला ऐसे समय में आया है जबकि बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे तेजस्वी के मुसीबतें और बढ़ सकती हैं।
कोर्ट के इस फैसले से लालू परिवार को बिहार चुनाव से पहले बड़ा झटका लगा है। सीबीआई की ओर से लगाए गए आरोपों को कोर्ट ने सही बताया है। आईपीसी की धारा 420 और 120बी के अलावा अन्य कुछ धाराओं में आरोप तय किए गए हैं। कोर्ट की ओर से कहा गया है कि यह घोटाला लालू प्रसाद यादव की जानकारी में हुआ। उनकी जानकारी में परिवार के सदस्यों को सस्ते दर पर जमीनें दी गई। आरोपियों की ओर से दी गई दलीलों को कोर्ट ने इनकार कर दिया। अदालत की ओर से कहा गया है कि सबूतों की पूरी चेन है। इस स्कैम के मुख्य साजिशकर्ता लालू यादव ही है।
इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव के बीच में ही कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, पूर्व सीएम राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। पेशी के लिए लालू, राबड़ी और तेजस्वी रविवार को दिल्ली पहुंच गए थे। सोमवार को सभी कोर्ट में हाजिर हुए। अब कोर्ट का यह निर्णय विधानसभा चुनावों पर बड़ा असर डाल सकता है। अदालत के आदेश से यह तय हो गया कि इस मामले में लालू परिवार के सदस्यों पर मुकदमा चलेगा। यहां बताते चलें कि यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान आईआरसीटीसी होटलों के रखरखाव के ठेकों के आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है।
क्या है आरोप
लालू परिवार से सदस्यों समेत 14 लोगों पर आरोप है कि आईआरसीटीसी होटलों के रखरखाव के ठेके लालू से जुड़ी एक बेनामी कंपनी से हासिल की गई तीन एकड़ कीमती जमीन के बदले में दिए गए थे। 7 जुलाई, 2017 को सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की और लालू प्रसाद और उनके परिवार से जुड़े पटना, नई दिल्ली, रांची और गुरुग्राम स्थित 12 ठिकानों पर छापेमारी की। सीबीआई ने दावा किया है कि सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। वहीं लालू प्रसाद के वकील ने तर्क दिया है कि उनके खिलाफ इस मामले में मुकदला चलाए रखने का कोई वैधानिक तर्क नहीं है। बहरहाल यह तो तय है कि कोर्ट के इस फैसले का बिहार चुनाव में खासा असर देखा जाएगा।


