राज्य और राजनीति
चन्दन मिश्र
झारखंड भाजपा को नया (कार्यकारी) अध्यक्ष मिल गया। अभी पार्टी ने सांसद आदित्य प्रसाद साहु को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इससे अब यह साफ हो चुका है कि झारखंड भाजपा की कमान उन्हें ही सौंपी जायेगी। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद आदित्य प्रसाद साहु को झारखंड भाजपा की कमान सौंपी जा सकती है। बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के बाद से ही यह कयास लगाया जा रहा था कि झारखंड भाजपा को जल्द ही नया अध्यक्ष मिल जायेगा। बाबूलाल मरांडी नेता प्रतिपक्ष के साथ-साथ झारखंड भाजपा के अध्यक्ष भी हैं। पार्टी एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत पर काम करती है और इस लिहाज से अध्यक्ष पद पर किसी नए चेहरे की तलाश शुरू कर दी गयी थी। अध्यक्ष पद पर कई नामों की चर्चा चल रही थी। इन नामों में सांसद आदित्य प्रसाद साहु का भी नाम लिया जा रहा था। आदित्य प्रसाद साहु पार्टी का एक बड़ा ओबीसी चेहरा हैं। वह वैश्य समुदाय से आते हैं। कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से पहले वह झारखंड भाजपा के महामंत्री के पद पर थे। संगठन में एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू करनेवाले आदित्य प्रसाद विनम्र स्वभाव के मिलनसार व्यक्तित्व के स्वामी हैं। पार्टी के लिए निरंतर काम करनेवाले आदित्य प्रसाद संगठन में निचले स्तर से उठकर प्रदेश स्तर के नेता बने हैं। मंडल अध्यक्ष से अपना सांगठनिक दायित्व का निर्वहन शुरू कर जिला और फिर प्रदेश समिति में विभिन्न पदों पर काम किया। पिछले तीन दशक से संगठन में काम करने का उन्हें लंबा अनुभव है। आदित्य प्रसाद झारखंड के मूल निवासी हैं। रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के कुचू गांव के निवासी हैं। रांची के पूर्व सांसद रामटहल चौधरी के सानिध्य में रहकर उन्होंने भाजपा में राजनीति का ककहरा सीखा। प्रदेश स्तर पर उन्होंने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। झारखंड भाजपा का नया कार्यकारी अध्यक्ष पद पर नियुक्त कर भाजपा नेतृत्व ने संगठन में सामाजिक और राजनीतिक समीकरण को संतुष्ट करने की कोशिश की है। झारखंड में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर आदिवासी चेहरा बाबूलाल मरांडी के निर्वाचित होने के बाद से ही यह तय हो चुका था कि किसी गैर आदिवासी को प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान सौंपी जायेगी। वैसे में ओबीसी समुदाय से ही किसी चेहरे की तलाश थी। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व ऐसे चेहरे की तलाश में था जो ओबीसी के साथ-साथ झारखंड का मूल निवासी हो। आदित्य प्रसाद इस कसौटी में खरे उतरते दिख रहे हैं। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले कार्यकारी अध्यक्ष पद पर रवींद्र कुमार राय को उनकी नाराजगी दूर करने के लिए नियुक्त किया गया था। वैसे संगठन में कार्यकारी अध्यक्ष का कोई स्थायी पद नहीं है। लिहाजा आदित्य प्रसाद साहु को कार्यकारी अध्यक्ष का पद अस्थायी तौर पर ही दिया गया है। उन्हें जल्द ही स्थायी अध्यक्ष नियुक्त किया जायेगा। एक ओबीसी को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का भाजपा को बिहार चुनाव में लाभ मिलने की संभावना है। बिहार के बनिया समुदाय के लिए यह हर्ष का विषय होगा कि उनके समुदाय से झारखंड भाजपा को नेतृत्व मिला है। कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भले अभी नहीं, लेकिन आनेवाले दिनों में जब आदित्य प्रसाद साहु को प्रदेश भाजपा की कमान पूरी तरह सौंप दी जायेगी तब संगठन को सक्रिय, कार्यकर्ताओं को ऊर्जावान और गतिशील बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। झामुमो-कांग्रेस गठबंधन की दूसरी बार सरकार बनने के बाद झारखंड भाजपा पर अभी शिथिल और निष्क्रय रहने का आरोप चस्पा हो रहा है। कार्यकर्ता हताश और निराश हैं। नए अध्यक्ष के लिए पार्टी को इस स्थिति से उबारना सबसे बड़ी चुनौती होगी। संगठन को ऊर्जावान और सक्रिय बनाना होगा। झामुमो-कांग्रेस सरकार के खिलाफ लगातार संघर्ष कर सड़क पर उतरना होगा। चुनाव आने के पहले पूरे संगठन को चुनाव जीतने की स्थिति में लाकर खड़ा करना होगा। आदित्य प्रसाद साहु के नेतृत्व क्षमता और सांगठनिक दायित्व की असली परीक्षा शुरू हो गई है। इस परीक्षा का परिणाम ही उनके राजनीतिक भविष्य का निर्धारण करेगा।


