चम्पाई सोरेन कल होंगे भाजपाई
कोल्हान में कमजोर भाजपा की स्थिति, क्या बदलेगी?
समाचार विश्लेषण
चंदन मिश्र
झारखंड आंदोलनकारी, झामुमो के वरिष्ठ नेता, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान सरकार के मंत्री चंपाई सोरेन 30 अगस्त से भाजपा के हो जाएंगे। चंपाई सोरेन एक नया सियासी इतिहास रचने की दिशा में बढऩेवाले हैं। लगभग चार दशक तक झामुमो के संग राजनीतिक सफर तय करने वाले चंपाई सोरेन झामुमो को अलविदा कर देंगे। यह ऐलान स्वयं चंपाई सोरेन ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर किया है। भाजपा में शामिल होने के पहले सोशल मीडिया में चंपाई सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है। चम्पाई सोरेन ने इसी पोस्ट में संतालपरगना के सीमावर्ती जिलों में बांग्ला देशी घुसपैठियों को लेकर भी काफी चिंता व्यक्त की है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पहली बार बांग्ला देशी घुसपैठियों को लेकर बयान जारी किया है। आदिवासी समाज खतरे में है। हमें आदिवासी समाज की रक्षा करनी है। चंपाई सोरेन के झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल होने पर चारों ओर अलग अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है। राजनीतिक हल्के में इसका निहितार्थ निकाला जा रहा है। चंपाई सोरेन के आने से भाजपा मजबूत होगी और झामुमो कमजोर होगा, इसका आकलन होना है। चंपाई सोरेन के साथ संताल परगना के पूर्व विधायक लोबिन हेंब्रम भी भाजपा में शामिल होंगे। झामुमो के दोनों वरिष्ठ नेता और गुरुजी के पुराने साथी रहे हैं। लेकिन झामुमो के वर्तमान हालात और नेतृत्व से निराश होकर दल छोडऩे का निर्णय ले लिया है। विधायक लोबिन हेंब्रम को विधानसभा अध्यक्ष रबिंद्र नाथ महतो उनकी विधायकी को दल बदल कानून के तहत बर्खास्त कर चुके हैं। लेकिन चंपाई सोरेन का दल छोडऩा झामुमो के लिए यह बहुत बड़ा सियासी झटका होगा। चम्पाई सोरेन कोल्हान के बड़े नेताओं में शुमार होते हैं। सरायकेला से वह विधायक निर्वाचित होते आए हैं। लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव पूरे कोल्हान क्षेत्र में है। पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम के अलावा उनका कर्म क्षेत्र सरायकेला खरसावां में उनका खासा दबदबा है। झामुमो में उनकी कद-काठी का कोई दूसरा नेता नहीं है, जो इसकी भरपाई कर पाएगा। इसलिए झामुमो के नेता अंतिम समय तक यह प्रयास करेंगे कि चंपाई सोरेन झामुमो छोड़कर न जाएं। लेकिन चंपाई सोरेन का फैसला शायद अंतिम है और अब वह अपने कदम पीछे नहीं खींचेंगे। यह तो तय है कि चंपाई सोरेन के कारण झामुमो को कोल्हान की लगभग आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर सीधा असर डालेगा। 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पूरे कोल्हान क्षेत्र में साफ हो गई थी। एक निर्दलीय और दो कांग्रेस सीटों को छोड़कर शेष सभी 11 सीटें झामुमो के खाते में गई थी। लेकिन इस बार बदले हुए समीकरण में ऐसा संभव नहीं लगता है। भाजपा भी चंपाई सोरेन के आने से कोल्हान की कई सीटों में झामुमो को कड़ी शिकस्त देने में सफल हो सकती है। अभी कोल्हान और संताल परगना में भाजपा जनजातीय सीटों में कमजोर है। लेकिन कोल्हान में चंपाई सोरेन और संताल परगना में लोबिन हेंब्रम के भाजपा में शामिल होने के बाद झामुमो कार्यकर्ताओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। भाजपा को इसका लाभ मिलेगा। बहरहाल आनेवाले दो तीन महीने के बाद झारखंड का राजनीतिक परिदृश्य बदल चुका रहेगा। झारखंड में विधानसभा चुनाव की बिगुल फूंक चुका रहेगा। झामुमो और भाजपा के बीच चुनावी जंग की तलवारें खींच जाएंगी। चुनाव के दौरान और उसके बाद ही इन नेताओं के बड़े दल बदल का राजनीतिक लाभ हानि दिखेगा। तब तक झारखंड को इस परिवर्तन का इंतजार करना पड़ेगा।
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