जापानी मैन्युफैक्चरर्स को प्रधानमंत्री ने दिया भारत आने का न्योता
टोक्यो । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान और चीन के दौरे पर हैं। शुक्रवार सुबह वह टोक्यो पहुंचे। इस दौरान उन्होंने टोक्यो में भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम की बैठक की संबोधित किया। मोदी ने अपने भाषण में भारत को निवेश के लिए सबसे बेहतर बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की नजरें ही नहीं, भरोसा भी भारत पर है। मोदी ने कहा कि जापान टेक्नोलॉजी में पावरहाउस है, तो वहीं भारत टैलेंट का पावरहाउस है। टेक्नोलॉजी और टैलेंट ही नेतृत्व कर सकते हैं। मोदी ने कहा भारत और जापान में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। मोदी से पहले जापान के पीएम इशिबा ने कहा कि भारतीय टैलेंट और जापानी तकनीक एक-दूसरे के लिए बने है। इस दौरान उन्होंने टोक्यो में आयोजित 15वें भारत-जापान समिट में हिस्सा लिया। समिट में मोदी और जापानी पीएम इशिबा की मौजूदगी में कई एमओयू भी एक्सचेंज किए गए। इशिबा ने भारत में अगले 10 सालों में 10 ट्रिलियन येन (करीब 6 लाख करोड़ रूपए) निवेश करने की बात कही है। उन्होंने भारत और जापान के स्मॉल, मीडियम उद्योग और स्टार्टअप को जोडऩे पर जोर दिया। वहीं, पीएम मोदी ने दोनों देशों की साझेदारी को दुनिया की शांति के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा- दोस्तों, हमने मिलकर अगले 10 सालों के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। साथ ही मोदी ने अगले भारत-जापान समिट के लिए इशिबा को भारत आने का न्योता दिया। इसके अलावा मोदी ने रूस-यूक्रेन जंग पर भारत के रुख को साफ करते हुए इसे मानवता के आधार पर देखने की बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर खास जोर दिया है और बिजनेस के लिए सिंगल डिजिटल विंडो अप्रूवल की व्यवस्था लागू की है। उन्होंने बताया कि एसएंडपी ग्लोबल ने दो दशक बाद भारत की क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड की है। ऑटो सेक्टर में भारत की साझेदारी बेहद सफल रही है और अब वही सफलता बैटरियों, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, शिप-बिल्डिंग और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी दोहराई जा सकती है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जापान मिलकर ग्लोबल साउथ, खासकर अफ्रीका के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं।
भारत ग्लोबल साउथ का स्प्रिंगबोर्ड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी रणनीतिक और समझदारी भरी है। इकोनॉमिक लॉजिक से प्रेरित होकर दोनों देशों ने साझा हितों को साझा समृद्धि में बदला है। उन्होंने कहा कि भारत जापानी बिजनेस के लिए ग्लोबल साउथ का स्प्रिंगबोर्ड है और मिलकर दोनों देश एशियाई सदी को स्थिरता, विकास और समृद्धि की दिशा देंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक और स्पेस जैसे क्षेत्रों में साहसिक और महत्वाकांक्षी कदम उठाए हैं। जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकते हैं। दोनों देशों ने क्लीन फ्यूल और ग्रीन फ्यूचर को लेकर जॉइंट क्रेडिट मैकेनिज्म समझौते पर साइन भी किए हैं। जापान के सहयोग से मुंबई और अहमदाबाद हाई स्पीड रेल पर काम चल रहा है। लेकिन हमारी यात्रा यहीं नहीं रूकती। जापान का एक्सीलेंस और भारत की स्केल मिलकर एक आदर्श साझेदारी बना सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा, भारत में आए बदलाव के पीछे हमारी- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म- की अप्रोच है। डिफेंस और स्पेस सेक्टर के बाद अब हम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को भी निजी कंपनियों के लिए खोल रहे हैं। आज दुनिया केवल भारत को देख ही नहीं रही, बल्कि भारत पर भरोसा भी कर रही है।
भारत-जापान की पार्टनरशिप भरोसे का प्रतीक
टोक्यो में भारत-जापान इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, भारत की विकास यात्रा में जापान हमेशा एक अहम पार्टनर रहा है। मेट्रो से मैन्युफैक्चरिंग तक, सेमीकंडक्टर से स्टार्टअप तक हमारी पार्टनरशिप आपसी विश्वास का प्रतीक बनी है और जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज भारत में राजनीतिक स्थिरता है, आर्थिक स्थिरता है, नीतियों में पारदर्शिता है और फैसलों में पूर्वानुमान की क्षमता है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। टोक्यो में पीएम मोदी ने कहा कि भारत निवेश के लिए सबसे प्रॉमिसिंग डेस्टिनेशन है। 80 प्रतिशत कंपनियां भारत में विस्तार करना चाहती हैं और 75 प्रतिशत पहले से मुनाफे में हैं। इसका मतलब है कि भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती ही नहीं है बल्कि कई गुना हो जाती है।


