संताल एक्सप्रेस संवाददाता
पाकुड़ । जिला मुख्यालय स्थित गोकुलपुर हटिया मैदान में गुरुवार को माझी परगना महासम्मेलन का आयोजन मुख्य संरक्षक सूरज टुडू के नेतृत्व में किया गया। सम्मेलन में पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, पूर्व बोरियों विधायक लोबिन हेंब्रम , झारखंड आंदोलनकारी श्यामलाल गौड़ , ग्राम प्रधान संजली मुर्मू, पतराम मुर्मू, जिला संयोजक शिवचरण मालतो आदि का जोरदार स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे संताल टाइगर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संताल परगना क्षेत्र में बंगलादेशी घुसपैठियों के कारण क्षेत्र में सामाजिक समरसता बिगड़ रही है। संताल परगना में एसपीटी एक्ट लागू है । जिसके तहत आदिवासियों की जमीन खरीद बिक्री नहीं हो सकती।बावजूद बांग्लादेशी घुसपैठिए अपनी पहचान छुपा कर आदिवासी की जमीन को हड़प रहे हैं। कई ऐसे जगह है जहां कभी आदिवासी हुआ करते थे आज वहां एक भी आदिवासी नहीं है। जन जंगल और जमीन का अधिकार हमसे कोई नहीं छीन सकता। जो जमीन हमारी थी हमारी ही रहेगी। हम अपनी एक-एक जमीन वापस लेंगे। हमारी जमीन से हमें कोई वंचित नहीं कर सकता।पूर्व मुख्यमंन्त्री ने आगे कहा कि बंगलादेशी घुसपैठियों द्वारा आदिवासी समाज के परम्परागत संस्कृति व अस्मिता को नष्ट करने में तुला हुआ है। मांझी परगना को आगे आकर आदिवासी संस्कृति को बचाना होगा। हमारे पूर्वजों कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी।जल , जंगल , जमीन की रक्षा हमारी नैतिक जिम्मेवारी है ।
वहीं बोरियों के पूर्व विधायक लोबिन हेंब्रम ने कहा कि संताल परगना में आदिवासियों की संख्या निरन्तर घट रही है। उसमें पाकुड़ जिला अव्वल है। जो एक चिंता का विषय है।इसके लिए आदिवासी मूलवासियों को मिलकर एक व्यापक जन आंदोलन छेड़ना पड़ेगा। अपनी संस्कृति को बचाये रखने के लिए मांझी परगना को आगे बढ़कर कार्य करना होगा। नहीं तो हमारा समाज धीरे-धीरे लुप्त हो जाएगा और इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगा। पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड अंतर्गत गयाबथान में आदिवासी समाज के ऊपर एक समुदाय विशेष के लोगों ने किस प्रकार से बर्बरता की यह किसी से छुपा नहीं है। यह लूट खसोट की सरकार अभी तक युवाओं के लिए स्थानीय नीति नहीं बन पाई है। हमें अपनी संस्कृति को बचाने के लिए जंग लड़ना होगा। इस महासम्मेलन में मुख्य संरक्षक सूरज टुडू ,जिला संयोजक शिवचरण मालती ,ग्राम प्रधान संजली मुर्मू पतराम मुर्मू आदि ने संबोधित किया एवं आदिवासी समाज को जागरूक किया और कहा कि आप अपनी जमीन जायदाद की चिंता करें इसको बचाए। किसी भी सर्त पर बाहरी लोगों को जमीन ना दे। अन्यथा वह जमीन आपके हाथ से निकल जाएगी।मौके पर चंद्रमोहन हांसदा , विकास गोड, जंतु सोरेन, नायका आदि मौजूद थे।
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